एसपी ट्रैफिक के यहां व्यापारियों ने क्रेन ड्राइवर को कूटा
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बरेली। व्यापार मंडल नेता की कार को नो पार्किंग में मानकर क्रेन से खींचकर ले जाने की कोशिश की गई तो मामला तूल पकड़ गया। कई व्यापारी नेता एसपी ट्रैफिक के दफ्तर जा पहुंचे। वहां क्रेन ड्राइवर भी शिकायत करने आ गया तो व्यापारियों ने उसे घेर लिया। दफ्तर के बाहर उसे जमकर पीटा। एसपी ट्रैफिक ने बाहर आकर खुद ही हस्तक्षेप किया तो ड्राइवर को बचाया जा सका। बड़ी मुश्किल से एसपी ट्रैफिक व्यापारियों को मना सके।
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री देवेंद्र जोशी अपने पिता के साथ गुरुवार दोपहर प्रभा टाकीज के पास बैंक से पेंशन निकलवाने गए थे। जोशी के मुताबिक उन्होंने साइड में कार लगाई और अपने एक कर्मचारी को कार के पास छोड़कर पिता के साथ बैंक में चले गए। इस बीच ट्रैफिक पुलिस के कुछ लोग क्रेन लेकर उनकी कार को ले जाने के लिए आ गए। जोशी के कर्मचारी ने जोशी को बुला लिया। जोशी का कहना था कि उन्होंने बताया कार सड़क पर नहीं खड़ी है और वे उसे हटा ले रहे हैं। आरोप है कि क्रेन का ड्राइवर अभद्रता पर उतर आया तो जोशी ने अपने संगठन के महानगर अध्यक्ष शोभित सक्सेना व अन्य साथियों को सूचना दे दी। इस बीच ट्रैफिक पुलिसकर्मी क्रेन लेकर मौके से चले गए।
विरोध जताने को व्यापारी एकजुट होकर एसपी ट्रैफिक एससी गंगवार के कार्यालय पहुंच गए। वहां इन्होंने एसपी ट्रैफिक का घेराव कर नारेबाजी की। एसपी ट्रैफिक से इनकी तकरार हो ही रही थी कि क्रेन ड्राइवर रामबहादुर दो लोगों के साथ वहां आ गया। तब व्यापारियों ने उसी को निशाने पर ले लिया। पहले दफ्तर के अंदर दोनों पक्षों में बहस चली और फिर व्यापारी राम बहादुर को दफ्तर के बाहर खींच लाए। यहां व्यापारियों ने उसे जमकर पीटा। शोरशराबे पर एसपी ट्रैफिक अपने स्टाफ के साथ बाहर आए और राम बहादुर को व्यापारियों से छुड़ाया। तब क्रेन ड्राइवर अभद्रता का आरोप लगाकर कार्रवाई कराने पर अड़ गया। व्यापारी अलग गुस्साए हुए थे। एसपी ट्रैफिक ने राम बहादुर से माफी मंगवाई तो व्यापारी शांत हुए और मौके से चले गए।
दो दिन नहीं चलेगा अभियान
शाम को एसपी ट्रैफिक ने फिर से व्यापारियों को अपने दफ्तर बुलाया और पुलिस लाइन परिसर में मारपीट की बात पर नाराजगी जताई। व्यापारियों का आरोप था कि चालान और क्रेन से वाहन उठाने का काम मनमानी से किया जा रहा है। तब एसपी ट्रैफिक ने कहा वि साथ ही कहा कि दो दिन तक क्रेन से गाड़ियों को उठाने का काम बंद रखेंगे और इस बीच में इस कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। वैसे पारदर्शिता से काम चल रहा है पर इसमें जिस भी सुधार की जरूरत होगी, वह किया जाएगा। यातायात पुलिस का उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग को परेशान करने का नहीं बल्कि व्यवस्था बनाने का है। कार्रवाई का असर देखने को मिल रहा है और लोग सड़क पर अपने वाहनों को लावारिस रूप से कम ही छोड़ते हैं।
आधा घंटा रहा हंगामा, मौके पर लगी भीड़
पुलिस लाइन के अपेक्षाकृत शांत रहने वाले परिसर में मारपीट से हंगामा मच गया। अपने वाहनों का चालान जमा करने आए लोगों से लेकर पुलिसकर्मी तक यहां जुट गए। परिसर में भीड़ लग गई और लोग तमाशबीन से मारपीट देखते रहे। घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं थीं। कुछ लोग चालान की जरूरत से ज्यादा बढ़ी राशि और ताबड़तोड़ कार्रवाई से आहत थे और मारपीट को सही बता रहे थे। व्यापारी भी कह रहे थे कि पुुलिस ने मनमानी की हद पार कर दी है। वहीं, कई लोग इस बात पर हैरत जता रहे थे कि पुलिस लाइन परिसर में पुलिस के सहयोगी के साथ ही मारपीट की जा रही है जो गलत बात है। लोगों का कहना था कि अगर इस तरह की घटनाएं होंगी तो पुलिस अपनी ड्यूटी कैसे कर पाएगी।