बरेली। एक रिटायर्ड दरोगा के साथ सूदखोरों के सताए फर्नीचर कारोबारी ने बुधवार दोपहर बाद एसएसपी दफ्तर आकर जहर खा लिया। कुछ घंटों बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उसके पास मिले सुसाइड नोट के आधार पर रिटायर्ड दरोगा और उसके सूदखोर भाई के खिलाफ थाना सुभाषनगर में रिपोर्ट दर्ज दोनों को हाथ के हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। आत्महत्या करने वाले शख्स के सुसाइड नोट के मुताबिक वह मूलधन से दोगुनी रकम ब्याज में देने के साथ अपना मकान भी दे चुका था, फिर भी सूदखोर उसका पीछा नहीं छोड़ रहे थे।
बुधवार दोपहर दो बजे करगैना की बीडीए कॉलोनी के 62 वर्षीय हरिप्रसाद मीना एसएसपी दफ्तर पहुंचे। कुछ देर परिसर में टहलते रहने के बाद उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों और पुलिस वालों को सल्फास के पैकेट दिखाकर बताया कि वह जान देने जा रहे हैं। यह जानकारी अपने दफ्तर में बैठे एसपी देहात डॉ. संसार सिंह तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत जन शिकायत प्रकोष्ठ प्रभारी सतीश कुमार को बुलाकर हरिप्रसाद से सल्फास के दोनों सीलबंद पैकेट छिनवा लिए और उनसे पूछताछ की। हाथ में एक सुसाइड नोट और तहरीर लिए हरिप्रसाद ने बताया कि दो साल पहले फर्नीचर की दुकान खोलने को उन्होंने कॉलोनी के ही राजीव सक्सेना और उनके रिश्ते के भाई रिटायर्ड दरोगा अशोक सक्सेना से करीब दो लाख रुपये लिए थे। ये लोग तीन लाख से ज्यादा रकम वसूल चुके हैं। ढाई महीने पहले उनका मकान भी लिखापढ़ी करके ले चुके हैं। फिर भी रकम बकाया बताकर मारपीट करते हैं। एसपी देहात ने हरिप्रसाद को पुलिस थाना सुभाषनगर भिजवा दिया जहां उनकी तबियत बिगड़ गई। पुलिस ने पौने चार बजे उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया जहां शाम सवा सात बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में हरिप्रसाद के बेटे संजय की ओर से थाना सुभाषनगर में रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जब से पिता से अभद्रता की तब से टेंशन में थे
संजय ने बताया कि दो दिन पहले दोनों ने घर आकर उनके पिता से अभद्रता की थी। तब से वह टेंशन में थे। एसपी देहात का कहना था कि हरिप्रसाद शायद कहीं बाहर से जहर खाकर आए थे। अगर उन्हें इसकी भनक होती तो वे उन्हें थाने की बजाय सीधे अस्पताल भेजते।