बरेली। जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराई गई नेपाली महिला के बच्चे को ले जाने के लिए बाइक सवार दो युवक तीन चक्कर काट चुके हैं। स्टाफ की सख्ती से उन्हें अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। वे कौन हैं इसके बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के बाद पुलिस ने महिला और बच्चे की सुरक्षा पुख्ता करने की बात कही है।
21 अगस्त को एक नेपाली महिला को करीब पांच दिन के नवजात बच्चे के साथ महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुभाष नगर इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र जोशी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि एक महिला बदायूं रोड पर नवजात बच्चा लिए बैठी है। उसकी हरकतें ऐसी हैं कि बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। तब उन्होंने पुलिस भेजी। महिला पुलिसवालों को देखकर और भड़कने लगी तो एंबुलेंस 102 और चाइल्ड लाइन को सूचित किया गया। इनकी मदद से महिला और उसके बच्चे को भर्ती करा दिया गया। अब चाइल्ड लाइन और अस्पताल का स्टाफ उनकी देखरेख कर रहा है।
अस्पताल स्टाफ की मानें तो अपाचे बाइक पर दो युवक तीन बार अस्पताल आ चुके हैं। वे कहते हैं कि उनके भाई सेना में हैं और ये बच्चा उन्हें चाहिए। बच्चा क्यों चाहिए या महिला से उनका क्या रिश्ता है, इसका जवाब नहीं देते। वे लोग उन्हें न तो महिला से मिलने देते हैं और न ही बच्चे तक जाने देते हैं। पुलिस और अस्पताल स्टाफ जिसे मानसिक मंद बता रहा था, वह महिला साफ साफ बात कर रही थी। सीने से बच्चे को चिपकाए महिला कह रही थी ये उसका बेटा है। ये रास्ते में ही पैदा हुआ। व कुछ लड़कियों के साथ काम करने नेपाल से आई थी, यहां आकर वो फंस गई। खाना-कपड़ा तो मिलता था पर मालिक पैसा नहीं देते थे। पति का नाम विकास बताया पर पता सही नहीं बता पा रही थी।
हर साल आती हैं दस हजार नेपाली महिलाएं
- नेपाल में तंगी और भारत में वहां के लोगों की बिना जांच पड़ताल आवाजाही ने मानव तस्करी का रास्ता खोल दिया है। हर साल करीब सात से दस हजार नेपाली महिलाएं अलग-अलग रास्तों से भारत आती हैं। इनमें अधिकांश को ठेकेदार टाइप लोग लेकर आते हैं। इनकी बड़ी जरूरत यहां सस्ते श्रमिक के रूप में है। रहने-खाने और मामूली पगार में यह घरों में रहकर काम करने को तैयार हो जाती हैं। नेपाली युवतियों को जिस्मफरोशी के धंधे में भी आसानी से इस्तेमाल कर लिया जाता है। भारत में सेरोगेसी (किराए की कोख) में काफी कानूनी पेंच होने और यह काफी महंगा होने से भी नेपाली महिलाओं का इस धंधे में इस्तेमाल बढ़ा है। कई लोग इनके सहारे सस्ते में अपनी संतान हासिल कर लेते हैं। कई बड़े अस्पताल चोरी छिपे नेपाल से जुड़े ऐसे लोगों से जुड़ाव रखते हैं तो सस्ते में नेपाली महिलाएं उपलब्ध करा दें।
- नेपाली महिला के भर्ती होने और उसके बच्चे की तलाश में लोगों के लगे होने की कोई सूचना अभी तक जिला महिला अस्पताल प्रशासन ने नहीं दी है। अस्पताल चौकी प्रभारी को उनकी सुरक्षा के बारे में सचेत किया जाएगा। चाइल्ड लाइन व अन्य संस्थाओं से भी मदद ली जाएगी ताकि बच्चा किसी गलत हाथ में न पड़ जाए। - गीतेश कपिल, इंस्पेक्टर कोतवाली