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जिस भांजे को सहारा दिया उसी ने कर दिया कत्ल

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जिस भांजे को सहारा दिया उसी ने कर दिया कत्ल - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। चौपुला चौराहे के पास गली में हुई राजमिस्त्री पवन की हत्या उसी सगे भांजे ने कर दी जिसे उसने सिर छुपाने को छत और सहारा दिया। बेटा जब मामा पर चाकुओं से वार कर रहा था तो उसकी मां बराबर में खड़ी देख रही थी। उसने भाई को तो बचाया नहीं, बल्कि बेटे को भगाने के बाद भाई को ही दोषी ठहराते हुए झगड़े की कहानी बना दी। पवन के बेटों ने फिर भी इंसानियत दिखाई और सबकुछ जानने के बाद भी बुआ को नामजद नहीं कराया।
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तीस साल का गुड्डू उर्फ लाली मूंगा शराब पीकर बवाल करने को लेकर बदनाम है। वह मूल रूप से गंगापुर का निवासी है। पिता प्रेम सिंह की मौत के बाद गुड्डू ने चार साल पहले अपना मकान बेचकर रुपया उड़ा दिया। उसके साथ उसकी मां चंद्रकांता भी बेघर हो गई। तब चौपुला पर रहने वाले गुड्डू के मामा पवन ने मां-बेटे को सहारा दिया। उन्हें अपने घर में रखा। बाद में बचे हुए पैसों से गुड्डू ने पवन के ही घर में छत पर एक कमरा बना दिया और मां के साथ रहने लगा। दो साल पहले उसकी शादी हुई पर कुछ समय बाद ही उसकी हरकतों की वजह से पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई। शराब पीकर हंगामा और मारपीट करना उसकी आदत रही। अक्सर पवन भी उसके साथ शराब पी लेते थे और दोनों के झगड़े से गली के वाशिंदे परेशान थे। करीब छह महीने पहले पवन ने बहन और भांजे को घर से निकाल दिया। तब ये नई बस्ती में किराए पर रहे। करीब डेढ़ महीने पहले पवन की खुशामद करके दोबारा घर में रहने आ गए। इसके बाद फिर झगड़ा और मारपीट शुरू हो गई। पवन अब फिर से दोनों को घर से निकालने का दबाव बना रहे थे तो गुड्डू तर्क देता था कि छत के कमरे में उसका रुपया लगा है, वह खाली नहीं करेगा। पवन के तीन बेटे भारत, छोटू और सोनू हैं। उसकी पत्नी की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
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