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बुद्धिजीवियों को तो हजम नहीं हो रहा डबल मर्डर का खुलासा

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बरेली। शहर के चर्चित दोहरे हत्याकांड का खुलासा बुद्धिजीवी वर्ग को तो किसी तरह हजम नहीं हो रहा। शहर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने वाले इन लोगों की मानें तो पुलिस की ये कहानी कोर्ट में धड़ाम हो जाएगी जिसका सीधा लाभ आरोपी को हो सकता है। पुलिस ने मेहनत करके खुलासा किया तो उसकी असल वजह खोलकर पूरे साक्ष्य जुटाने चाहिए थे। ऐसे ही कुछ बुद्धिजीवियों से अमर उजाला ने बात की।
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जिसने सुपारी दी उसे मारने की तुक नहीं
- मैंने अपने कार्यकाल में तमाम बड़ी घटनाओं के खुलासे देखे सुने हैं पर जिसने सुपारी दी, उसी की हत्या का मामला पहली बार सुना है। इस बात को साबित करने के लिए पुलिस को बहुत सारे साक्ष्य देने होंगे। अभी तक की स्थिति से नहीं लगता कि पुलिस ऐसा कर पाएगी। पुलिस के केस पर मेहनत न करने की वजह से आरोपी को लाभ मिलेगा। घटना कोई चश्मदीद न होना और कमजोरी है। - घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती दिखी पुलिस
- चरित्र पर सवाल के मामले में मृतक तो अपना पक्ष रख नहीं सकते, ऐसे में पुलिस ने बिना तथ्यों के केवल आरोपी के हवाले से यह दावा करके सही नहीं किया। परिवार को सोसायटी में चेहरा दिखाना मुश्किल हो जाएगा। अभी तक की स्थिति से मुझे लगता है कि पुलिस को और विवेचना करके सही तथ्य सामने लाने चाहिए थे, खुलासा जल्दबाजी में किया लगता है। ऐसी बात कहकर आरोपी ने भी खुद को बेचारा साबित करने की होशियारी की है कि उसे न चाहते हुए मजबूरी में ये सब करना पड़ा। - एसके कपूर, रिटायर्ड बैंक अधिकारी
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पुलिस की भूमिका पर उठ रहा भरोसा
- इसी तरीके के कामों से पुलिस अपनी विश्वसनीयता खोती जा रही है। किसी महिला के चरित्र पर सवाल उठाना काफी आसान हो गया है। आरोपी ने अगर ऐसा कहा भी तो पुलिस को उसके बयान की पूरी तस्दीक करनी चाहिए थी। परिवार को भी भरोसे में लेना चाहिए था। महिला का स्टेट्स काफी ठीक था, किसी ऑटो वाले से उसका संबंध जोड़ने की बात कुछ अटपटी लगती है। पुलिस के बारे में मशहूर है कि वो किसी को भी फांस या निकाल सकती है। - मनु नीरज, समाजसेविका
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