बरेली। डबल मर्डर में चार दिन से अवैध हिरासत में रखे गए बल्लू को पुलिस हत्यारोपी साबित नहीं कर सकी। पुलिस ने सोमवार रात उसे परिवार के हवाले कर दिया। उसे आरोपी बनाने लायक एक भी प्रमाण पुलिस को नहीं मिला। स्थानीय जनता की शिकायत पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी उसे छोड़ने की सिफारिश की थी। अब पुलिस आरोपी को ले जाने वाले ऑटो की तलाश कर रही है।
गुलमोहर पार्क में डबल मर्डर के आरोपी संदिग्ध की सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद उससे मिलती शक्ल के आधार पर शुक्रवार रात सिकलापुर के बबलू सिंह उर्फ बल्लू को उठाया गया था। खाना खाते बल्लू को पुलिस पीटती ले गई थी। तब से उसे कभी बिथरी थाने तो कभी पुलिस लाइन स्थित स्वॉट टीम के दफ्तर में रखा गया। सोमवार शाम बस्ती के लोग कोतवाली पहुंचे और फिर सीओ सिटी अशोक कुमार से मुलाकात कर बल्लू को छुड़ाने की मांग की। कहा कि पुलिस न तो बल्लू को छोड़ रही है और न ही उन लोगों से मिलने या बात करने दे रही है। बल्लू की पत्नी राधा और छह बच्चों का बुरा हाल है। राधा ने खाना छोड़ दिया है, उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। तब सीओ ने उच्चाधिकारियों से बात की और थोड़ी ही देर में पुलिस ने बल्लू को छोड़ने का ऐलान कर दिया। उसे कहीं से इज्जतनगर थाने और फिर प्रेमनगर थाने लाया गया। रात नौ बजे परिवार को प्रेमनगर थाने बुलाया गया। भाई राजेंद्र सिंह व तीन अन्य से सुपुर्दगीनामा लिखवाकर उसे उनके साथ भेज दिया गया। पौने दस बजे बल्लू अपने घर आ गया। यहां उसने पत्रकारों को बताया कि चार दिन में अधिकारियों से लेकर क्राइम ब्रांच टीम ने उससे कई बार बात की। मोबाइल की कॉलडिटेल, घर से उठाए कपड़े, चाल, चेहरा चेक करने के बाद दूसरे ही दिन उससे कह दिया कि घटना से उसका मतलब नहीं है। तब से दोनों टाइम उसे खाना देने के साथ ही चाय नाश्ता भी कराया। कभी मारपीट नहीं की और न ही किसी हवालात में रखा। उसे कभी थाने के क्वार्टर में तो कभी किसी दफ्तर जैसे कमरे में रखा जाता था। पूछताछ का तरीका भी सख्ती भरा नहीं होता था।
घर पर जश्न का माहौल
बल्लू के घर लौटते से पहले ही जश्न जैसा माहौल था। पूरी बस्ती के बच्चे घर के पास शोर मचा रहे थे। सामने मंदिर में बल्लू के परिजन, बस्ती की महिलाएं और बच्चे पूजन कर रहे थे। स्थानीय पार्षद विनोद सैनी भी बस्ती के लोगों के साथ यहां खड़े थे। सैनी ने बताया कि हर साल दूसरे सोमवार को बस्ती से लोग कांवड़ लेकर जलाभिषेक करते थे। इस बार बल्लू के परिवार की परेशानी देखकर अधिकांश लोग नहीं गए और अब तीसरे सोमवार को जाने का विचार है। बल्लू के आते ही स्वागत में लोगों ने भोले के जयकारे लगाए। मां और पत्नी की आंखों में आंसू भर आए। बच्चे भी पिता से लिपटकर खुश थे।
फिंगरप्रिंट भी नहीं मिले तो छोड़ा
पुलिस ने सबूत न मिलने पर बल्लू के फिंगरप्रिंट का नमूना ले लिया था। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने इसे मुरादाबाद लैब भेजकर विशेष प्रयास करके घर में मिले खून सने हाथ के निशानों से मिलान कराया था। इसमें भी बल्लू निर्दोष निकला। तब पुलिस के पास उसे छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इंस्पेक्टर प्रेमनगर बलवीर सिंह ने बताया कि हर पहलू पर जांच के बाद बल्लू निर्दोष निकला तो उसे छोड़ दिया गया। उसे केवल पूछताछ के लिहाज से लाया गया था, हिरासत में नहीं लिया गया था।
कोचिंग विज्ञापन वाले ऑटो की तलाश में जुटी पुलिस
बरेली। डबल मर्डर के खुलासे में अब एक ऑटो की पहचान को लेकर पेंच अटक गया है। इसके लिए सोमवार को पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने डेलापीर तिराहे पर ऑटो ड्राइवरों से पूछताछ कर एक ऑटो का सुराग निकालने की कोशिश की। इसके ड्राइवर से पूछताछ के बाद आरोपी के जाने की दिशा और पहचान को लेकर स्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस को डेलापीर तिराहे से एक ऑटो में संदिग्ध हत्यारोपी के बैठकर जाने की फुटेज मिली थी। अंधेरे की वजह से पहले यह तय नहीं हो पा रहा था कि वह दंपती के घर के पास फुटेज में दिखाई देने वाला हत्यारोपी है या कोई और है। बाद में कुछ और फुटेज से यह साबित हो गया कि दोनों फुटेज एक ही व्यक्ति की हैं। ऑटो पर कोई नंबर नहीं दिखाई दे रहा है, उसके पीछे शहर के एक कोचिंग संस्थान मेट्रिक्स का विज्ञापन होर्डिंग लगा नजर आ रहा है। सोमवार को पुलिस ने डेलापीर तिराहे के कई ऑटो ड्राइवरों से पूछताछ कर ऐसे ऑटो को चिह्नित करने की कोशिश की जिन पर इस तरह का विज्ञापन लगा है। हालांकि पूरी तरह स्पष्ट फुटेज नहीं है पर टीम को लग रहा है कि यह ऑटो सौ फुटा रोड की ओर गया है। टीम आगे के रास्ते की फुटेज से कातिल के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है, हालांकि अंधेरे की वजह से पुष्टि नहीं हो पा रही है।
सात दिन पुरानी फुटेज निकलवाईं
सोमवार को क्राइम ब्रांच टीम ने सेटेलाइट बस स्टैंड, पुराने रोडवेज और जंक्शन के सीसीटीवी कैमरे चेक किए। हालांकि ये कैमरे पहले भी चेक किए जा चुके हैं पर इस बार यहां से सात दिन पुरानी सीसीटीवी फुटेज निकलवाई गई है। टीम घटना से एक-दो दिन पहले की फुटेज सर्च कर रही है। उम्मीद है कि आरोपी अगर बाहर का है तो वह एकाध दिन पहले ही शहर में आया होगा। उसकी ट्रेन या बस के बारे में जानकर आगे की लोकेशन पता करने का इरादा है।
तो फटा चेक गुमराह करने को फेंका था
मृतक रूपा के शव के पास उन्हीं के खाते का एक सादा और फटा हुआ चेक मिला था। ऊपर कुछ और खाली चेक मिले थे। पुलिस ने इन्हीं कब्जे में ले लिया था। शुरू में लग रहा था कि रुपयों के लेनदेन की वजह से वारदात हुई होगी पर अब लगता है कि यह चेक जांच की दिशा गुमराह करने को फेंका गया था। रूपा के बेटे नीरज का कहना था कि चेक पुराना रहा होगा। इसे लेकर उन्होंने किसी से शिकायत नहीं की। मां के बैंक खाते में भी कोई गड़बड़ी नहीं है। अधिकारियों ने भी चेक को लेकर रूपा की बैंक के प्रबंधक जेएस कुटियाल से मिलकर खाते की जांच कराई। खाते में साल भर पहले का लेनदेन देखा गया। इसमें न तो कोई बड़ी रकम थी और न ही कोई संदिग्ध लेनदेन था।
बैंक के दूरदराज स्टाफ से भी पूछताछ
रूपा के तेज कामकाज और व्यवहार का बैंक स्टाफ कायल रहा है। पुलिस ने उनकी बैंक व रीजनल ऑफिस में जाकर रूपा के व्यवहार व कामकाज को लेकर स्टाफ से पूछताछ की। इस बात की भी जांच की गई कि कहीं किसी स्टाफ या ग्राहक से उनका झगड़ा तो नहीं हुआ या रुपयों का लेनदेन तो नहीं था। जो स्टाफ बैंक में नहीं मिला या दूसरे शहरों का था, उन्हें अधिकारियों ने अपने दफ्तर में बुलाकर पूछताछ कर ली। पूरी पड़ताल के बाद पुलिस ने नतीजा निकाला कि बैंक से जुड़ा कोई ऐसा मामला नहीं था जिसकी वजह से हत्या की गई हो।