फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लाश का वेंटिलेटर पर इलाज, डॉक्टर साहब! जांच इलाज पर थी, यह तो डिग्री पर आ गई

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल की जांच में लाश के इलाज और घरवालों से रुपये ऐंठने की पुष्टि होने के बाद अब डॉक्टर की एमसीएच की डिग्री फर्जी होने के बात सामने आ रही है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इसकी पुष्टि की है। आगे कार्रवाई क्या होगी। यह भी तय नहीं हो पाया है।
विज्ञापन

पूरनपुर निवासी राजू के परिवार वालों ने 18 जुलाई को प्रशासन से शिकायत की थी कि गौहनिया चौराहा स्थित एक अस्पताल में राजू की मौत के बाद भी उसकी लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज किया जाता रहा और एक लाख रुपये वसूल लिए गए। डीएम ने इसकी जांच कराई तो मामला सही पाया गया। लेकिन जांच रिपोर्ट में पूरी तरह फंसने की भनक लगते ही आरोपी डॉक्टर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सत्तापक्ष के नेताओं से प्रशासन पर दबाव डलवाना शुरू कर दिया। इस पर प्रशासन ने कार्रवाई को गेंद शासन के पाले में डाल दी। लेकिन इसी बीच डॉक्टर की डिग्री का मामला उभर आया, जो जांच में फर्जी पाई गई। इस मामले को पहले सीएमओ कार्यालय से ही दबा दिया गया था। इधर आरोपी डॉक्टर का कहना है कि उसकी छवि खराब करने के लिए फंसाया जा रहा है।

महाराष्ट्र में नहीं ऐसी डिग्री देने वाला कॉलेज
सूत्र बताते हैं कि बयान देने पहुंचे आरोपी चिकित्सक से जब पैनल ने उसकी एमसीएच और एमएस की डिग्री के बारे में पूछताछ की तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। बताते हैं कि फेलोशिप इन न्यूरो सर्जरी डिग्री देने वाला महाराष्ट्र में कोई कॉलेेज ही नहीं है। डॉक्टर के ओपीडी पर्चे पर एमबीबीएस, एमएस, एफ.सीपीएस, एमसीएच (न्यूरो सर्जरी यूएस) अंकित है। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसलिंग में डॉक्टर का पंजीकरण तक नहीं है।
विज्ञापन


आनन-फानन में लिपिक का पटल बदला
लाश का इलाज करने वाले आरोपी चिकित्सक की डिग्रियां फर्जी होने की आशंका पर जब पिछले दिनों इससे संबंधित रिपोर्ट मांगी गई तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए थे। सीएमओ ने डॉक्टर की प्रैक्टिस और ऑपरेशन करने पर रोक लगाने के लिए पत्र भी जारी किया, लेकिन उसे डॉक्टर को रिसीव कराने के बजाय गायब कर दिया गया। इसमें सीएमओ कार्यालय के एक लिपिक की भूमिका सामने आने पर सीएमओ ने उसका पटल बदल दिया है।

डॉक्टर बोले- मुझे साजिशन फंसाया जा रहा

राजू की पत्नी के शपथपत्र से जांच पर उठे सवाल
आरोपी डॉक्टर ने राजू की पत्नी से अपने हक में जो शपथपत्र हासिल किया है, उसमें कहा गया है कि डॉक्टर ने राजू की हालत के बारे में घरवालों को पहले ही बता दिया था। घरवालों ने जब उसकी छुट्टी करने के लिए दबाव डाला तो डॉक्टर ने मना किया, इसके बावजूद घरवालों ने छुट्टी करा ली। वेंटिलेटर से हटने के कुछ देर बाद राजू की मृत्यु हो गई। अगर राजू की पत्नी के इस बयान को सच माना जाए तो डॉक्टर ने राजू को आठ जून की दिन में साढ़े ग्यारह बजे हायर सेंटर रेफर करने के लिए अपने यहां से छुट्टी की थी। यानी उस वक्त राजू जिंदा था, तब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत रेफर करने से सात घंटे पहले होने की बात कैसे सामने आई है। इन्हीं सब वजहों से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि प्रशासन डॉक्टर को बचाने के चक्कर में उन्हें सवालों के घेरे में खड़ा कर देना चाहता है।

डॉक्टर की डिग्री फर्जी निकलने की बात सामने आई है। लिहाजा, मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ को कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है। -वैभव श्रीवास्तव, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें