बरेली। शासन के निर्देश पर जिले में बड़े पैमाने पर हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इसमें निर्धारित अवधि तक पुलिस से चालान न छुड़वाने की स्थिति में चालान कोर्ट भेज दिया जाता था। नई व्यवस्था में ई चालान का साफ्टवेयर कोर्ट के पास फिलहाल नहीं है। इसलिए वहां से चालान में राहत का रास्ता फिलहाल बंद है। ई चालान कोर्ट में भेजे भी नहीं जा रहे हैं।
शहर से लेकर देहात तक सुबह शाम वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया जा रहा है। कागजों से इतर चेकिंग का सबसे ज्यादा जोर हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर है। चालान की धनराशि करीब पांच गुना बढ़ने से भी वाहन चालकों की मुसीबत बढ़ी है। बिना हेलमेट या सीट बेल्ट वाले लोगों को रोककर चेकिंग होती है तो आरसी, डीएल, बीमा व अन्य कमियां भी निकल आती हैं। इसमें तगड़ा जुर्माना हो रहा है। बाइकों के ही चालान पांच सौ से सात हजार तक के हो रहे हैं। कारों पर जुर्माने की राशि पंद्रह हजार या उससे ज्यादा है।
पहले कागज पर चालान होने में धनराशि कम होती थी। विकल्प भी होता था कि यातायात पुलिस से सप्ताह या पंद्रह दिन में चालान न छुड़वाने पर इसे कोर्ट भेज दिया जाएगा। तमाम लोग ज्यादा चालान होने पर पुलिस के पास न जाकर सीधे कोर्ट में अर्जी लगाते थे। कई बार कोर्ट से स्थिति के आधार पर चालान की रकम को बेहद कम कर दिया जाता था, जिससे वाहन चालक को काफी राहत मिलती थी। नई व्यवस्था में मोबाइल में पड़े साफ्टवेयर के जरिये ई चालान हो रहे हैं। इनमें दुपहिया वाहनों के चालान सीओ ट्रैफिक, तो चार पहिया वाहनों के चालान एसपी ट्रैफिक के दफ्तर में छूट रहे हैं। ई चालान का साफ्टवेयर कोर्ट में न होने से ये चालान वहां भेजे ही नहीं जा रहे। यानी हर हाल में निपटारा पुलिस ही कर रही है। चालान ज्यादा होने या किसी मनमानी की स्थिति में भी वाहन चालकों को इसे भुगतना पड़ रहा है।
जो भुगतान हुए वो दिखे नहीं
कुछ वाहन चालकों ने कोर्ट से मामला निपटाने की बात कही तो ट्रैफिक पुलिस दफ्तर से जुर्माना कार्रवाई का प्रिंट निकालकर कोर्ट को आख्या बनाकर दे दी। इन लोगों ने कोर्ट के जरिये जुर्माना बैंक के जरिये जमा भी कराया पर ई चालान सिस्टम से अपडेट न होने की वजह से ये भुगतान शेष ही दिखा रहा है।
कोर्ट में भी लागू होगी नई व्यवस्था
एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि कोर्ट में भी चालान का डाटा देखने व भुगतान के लिए सिस्टम अपडेट किया जा रहा है। हाल ही में टीआई को भेजकर न्यायिक अधिकारियों से इस विषय पर बात कराई गई है। कोर्ट को इससे संबंधित आईडी उपलब्ध करा दी जाएगी। बताया कि वैसे उनके कार्यालय में भी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। अगर कहीं मनमानी की स्थिति मिल रही है तो वहां स्टाफ पर भी कार्रवाई की जा रही है। मनमाना चालान भी कम किया जा रहा है।