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नाव से तालाब में सैर कर रहे दो छात्रों की डूबकर मौत

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रिछा (बरेली)। नजदीकी गांव गरगैया में मछलियां पकड़ने के लिए बनाई नाव में बैठकर तालाब में सैर कर रहे दो छात्रों की डूबने से मौत हो गई। उनके दो हमउम्र साथी तैराक होने की वजह से बच गए। घंटों की मशक्कत के बाद दोनों छात्रों के शव बाहर निकाले जा सके। परिवारों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया तो पुलिस ने शव उनके सुपुर्द कर दिए। हादसे के बाद से मृतकों के घरों में कोहराम मचा है।
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गरगैया गांव निवासी नासिर का 14 वर्षीय पुत्र नाहिद और गांव माधौपुर पट्टी, अमरिया (पीलीभीत) निवासी शहीद का 15 वर्षीय बेटा उवैस गांव के जूनियर हाईस्कूल में पढ़ते थे। नाहिद कक्षा आठ और उवैस कक्षा सात का छात्र था। उवैस गरगैया में अपने मामा नवी अहमद के यहां रहता था। दोनों शुक्रवार को स्कूल नहीं गए और सुबह नौ बजे अपने हमउम्र छात्र आशिक पुत्र कयूम तथा महफूज पुत्र शरीफ अहमद के साथ गांव से एक किमी दूर नवादा रोड पर स्थित तालाब पर पहुंच गए। उस वक्त तालाब स्वामी वहां मौजूद नहीं था। छात्रों ने तालाब से मछली पकड़ने के लिए बनाई गई जुगाड़ू नाव किनारे बंधी देखी तो चारों नाव में बैठ गए और तालाब में सैर करने लगे। कुछ दूर जाकर नाव हिचकौले खाने लगी तो चारों छात्र घबरा गए। आशिक और महफूज तैरना जानते थे, सो वे नाव से कूद गए और तैरकर तालाब से बाहर निकल आए, लेकिन नाहिद और उवैस नाव समेत तालाब में डूब गए। गांव में जब यह सूचना पहुंची तो तालाब किनारे भीड़ लग गई। सूचना पर देवरनिया इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह फोर्स के साथ रामगंगा से गोताखोरों को लेकर मौके पर पहुंचे। तीन घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने पहले उवैस का शव निकाला। इसके बाद नाहिद का शव मिला। छात्रों के शव मिलते ही दोनों के परिवारों में कोहराम मच गया। पुलिस शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने लगी तो परिवारों ने मना कर दिया। पुलिस ने पंचनामा भर कर शव परिवारों को सौंप दिए। सीओ बहेड़ी रामानंद राय भी मौके पर पहुंचे।

पटले जोड़कर बनाई गई थी नाव
- जिस तालाब में छात्र डूबे, वह काफी गहरा है। उसमें मछली पालन होता है। मछलियों को पकड़ने के लिए लकड़ी के पटले जोड़कर नाव बनाई गई थी जो ज्यादा वजन पड़ने से दगा दे गई। तालाब स्वामी उत्तम चंद्र के मुताबिक वह ज्यादातर वक्त तालाब किनारे झोपड़ी में ही रहते हैं, लेकिन उस वक्त वह घर खाना खाने गए थे, तभी बच्चे तालाब पर पहुंच गए और यह हादसा हो गया। हर कोई इस घटना से दुखी था। जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक प्रमोद गंगवार ने बताया कि दोनों छात्र पढ़ने में होशियार थे।
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ननिहाल में पढ़ाई के साथ बक्से बनाने का काम सीखता था उवैस
रिछा। उवैस माधौपुर पट्टी गांव का रहने वाला था। गरगैया में उसकी ननिहाल है। वह अपने मामा मोहम्मद नवी के यहां रहकर पढ़ता था। उवैस तीन भाई बहनों में सबसे छोटा था। उसके पिता शहीद अहमद की आठ साल पहले हादसे में मौत हो गई था। मां खेती और कारचोबी का काम करके परिवार चलाती है। उवैस पढ़ाई के साथ अपने मामा के साथ बक्से बनाने का काम भी सीखता था। वह एक सप्ताह पहले ही मां किशवरी से कहकर आया था कि अब चेहल्लुम पर घर आएगा। नाहिद के पिता नासिर मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। पढ़ाई में तेज होने के कारण नासिर नाहिद से घर का कोई काम नहीं कराते थे।
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