बरेली। डीआईजी दफ्तर के पास हुए सड़क हादसे ने रिटायर्ड बैंक प्रबंधक के परिवार की खुशियां छीन लीं, वहीं मेहनतकश शख्स की जान खतरे में है। कार का ओवरस्पीड होना घटना की मुख्य वजह रहा जिससे कार का भी कबाड़ा हो गया। स्थानीय राहगीरों ने देवदूत जैसा काम किया जिससे बाइक और कार सवार लोगों को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सका।
शाम ढले हुए हादसे में कार की तेज स्पीड के साथ ही अचानक रोड पर आया घोड़ा भी एक वजह रहा। कार में तीन लोग सवार थे। ये आपस में बातों करते हुए जा रहे थे। कार ड्राइव कर रहा शख्स घोड़े को बचाने के चक्कर में कार को तेजी से दूसरी साइड में ले गया। इससे अपनी सही दिशा में ईवनिंग वॉक कर रहे रिटायर बैंक प्रबंधक एमके गुप्ता कार का शिकार हो गए। इस एक्सीडेंट से कार ड्राइवर और घबरा गया। कार उसके नियंत्रण से बाहर होकर सड़क किनारे पोल में घुस गई। इससे पहले उसने मनोज की बाइक में टक्कर मार दी। मनोज की बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वे दूर जा गिरे। तब कार से उतरकर लोग भागने लगे। सभी को हल्की चोटें लगी थीं। इनमें से दो भाग भी निकले पर तीसरा शख्स नहीं भाग सका। कार में कराहते इस युवक को भी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। डीआईजी दफ्तर का स्टाफ भी बाहर निकल आया और घायलों की मदद की।
सूख गए पत्नी के आंसू
- एमके गुप्ता की पत्नी सुनीता पति की मौत से काफी सदमे में थी। काफी देर रोने के बाद वे शांत होकर एक ओर बैठ गईं। उनका चेहरा सपाट हो गया था और आंसू सूख गए थे। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं। एक जयपुर और दूसरा बंगलुरु में जॉब करता है। वे दोनों ही घर में रहते थे। पति सुबह और शाम टहलने जाते थे। रविवार शाम भी वे रोज की तरह निकले थे, इस तरह साथ छोड़ जाएंगे ये यकीन नहीं था। पति के मोबाइल से एक रिश्तेदार को कॉल करके पुलिस ने उनकी तस्दीक की। उन्हें पति की मौत की सूचना रिश्तेदारों के जरिये मिली।
पैटर्न लॉक न खुलने से पहचान में हुई देर
- मनोज सक्सेना की हालत नाजुक होने पर उन्हें भर्ती तो करा दिया गया पर उनकी पहचान को लेकर पुलिस और अस्पताल स्टाफ दोनों ही काफी देर जूझे। उनके मोबाइल में पैटर्न लॉक पड़ा हुआ था जिसे खोलने की काफी मशक्कत की गई। बाद में पुलिस ने ये सोचकर मोबाइल अपने पास रख लिया कि कोई कॉल आने पर बता देंगे। मनोज की पत्नी अर्चना ने पति को कॉल की तो चौकी चौराहा चौकी प्रभारी वेदपाल ने उन्हें बुला लिया। अर्चना ने बताया कि उनके पति पहले होटल पर काम करते थे। फिलहाल काम छोड़ दिया था। शाम को किसी परिचित के पास जाने को कहकर घर से निकले थे।
पीलीभीत के अमरिया की है गाड़ी
- पुलिस ने नई स्विप्ट डिजायर के नंबर के आधार पर कार मालिक का नाम पता निकाला। कार पीलीभीत की अमरिया तहसील के गांव भुवानी सरदार नगर निवासी सुरेंद्र पाल पुत्र हीरालाल के नाम निकली। चौकी प्रभारी की जांच के मुताबिक कुछ लोग बरेली रिश्तेदारी में पीलीभीत से कार लेकर आए थे। कार से ही ये लोग घूमने निकले तो ये घटना हो गई।