लड़की के आरोप खारिज करने में जुटा रेलवे का पूरा सिस्टम
लड़की ने कहा था पीतांबरपुर स्टेशन छूटते ही ट्रेन से फेंका, स्टेशन मास्टर ने टिसुआ पर बताई ट्रेन की स्पीड
पीआरवी ने भी दी थी लड़की को ट्रेन से फेंके जाने की सूचना
बरेली। ट्रेन की रफ्तार का पेच फंसाकर रेलवे ने काठगोदाम एक्सप्रेस में छेड़छाड़ के बाद लड़की को चलती ट्रेन से फेंकने की घटना को खारिज कर दिया। गांव वालों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस रिस्पांस वैन के स्टाफ ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा था कि लड़की को ट्रेन से फेंका गया है लेकिन स्टेशन मास्टर की रिपोर्ट का हवाला देकर जीआरपी इसे मानने से इनकार कर दिया। यही नहीं आरपीएफ की अस्पताल में पूछताछ के बाद अचानक डरी-सहमी पीड़िता घायल हालत में ही अपने अंकल के साथ लखनऊ चली गई इसलिए उस पर दबाव बनाए जाने की भी आशंका जताई जा रही है।
पीलीभीत में आसाम रोड की एक मार्केटिंग कंपनी में नौकरी करने वाली देवरिया की 20 वर्षीय युवती गुरुवार को पहली बार मां से मिलने अपने गांव जा रही थी। गुरुवार रात फरीदपुर सीएचसी में भर्ती घायल युवती ने बताया था कि पीलीभीत से वह बस से बरेली आई और जंक्शन से शाम चार बजे लखनऊ जाने के लिए काठगोदाम एक्सप्रेस में बैठी। युवती के अनुसार जब वह जंक्शन पर पहुंची तो ट्रेन चलने लगी थी, इसलिए वह अंतिम बोगी में चढ़ गई। इसी बोगी में एक युवक चढ़ गया। बरेली से ट्रेन बढ़ी तो युवक ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया। तब तो उसने हाथ हटा दिया लेकिन ट्रेन पीतांबरपुर रेलवे स्टेशन से निकलते ही युवक बेखौफ होकर छेड़छाड़ करने लगा। उसने गेट की तरफ जाकर कॉल करने का प्रयास किया तो युवक ने उसका मोबाइल छीनकर चलती ट्रेन से धक्का दे दिया। वह द्वारिकेश चीनी मिल के पास गिरी और बेहोश हो गई। होश आया तो वह आगे खेत में काम कर रहे लोगों के पास पहुंची और उन्हें घटना की जानकारी देकर मदद मांगी।
ग्रामीणों की सूचना पर फतेहगंज पूर्वी की यूपी-1122 पीआरवी ने युवती को फरीदपुर सीएचसी में भर्ती कराया। पीआरवी 204 के एचसीपी शिवराज सिंह और कांस्टेबल पंचम सिंह ने भी सीएचसी में यही स्थिति दर्ज कराई है। बताया है कि खंजनपुर के पास ईख काट रहे किसानों की सूचना पर वे पहुंचे तो युवती वहां घायल अवस्था में मिली। उसने खुद को ट्रेन से फेंकने की ही बात बताई। तब वह उसे ले आए। अब जीआरपी समेत रेलवे का पूरा अमला ही घटना पर पर्दा डालने में जुटा है।
पहले सूचना न मिलने की बात कहकर टाला, फिर स्टेशन मास्टर की रिपोर्ट का दिया हवाला
स्टेशन मास्टर की रिपोर्ट के मुताबिक काठगोदाम से लखनऊ जा रही एक्सप्रेस दोपहर 4:05 से 4:10 बजे के बीच पीतांबर और टिसुआ स्टेशन से गुजरी थी, उस समय ट्रेन की स्पीड 90 किमी घंटे की थी। इतनी स्पीड से दौड़ती ट्रेन से फेंके जाने के बाद कोई नहीं बच सकता। जीआरपी इंस्पेक्टर कृष्णऔतार ने सफाई दी कि युवती ट्रैक से 700 मीटर दूर छोटेलाल के खेत में मिली। जहां उसके गिरने की बात बताई जा रही है, वहां छोटी झाड़ियां हैं। वहां गिरने से इस तह की चोट नहीं आ सकती, जैसी युवती को आई है। यूवती की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भी जीआरपी उसे ट्रेन से फेंकने की संभावना को खारिज कर रही है। कहा जा रहा है कि पीड़िता के सिर पर तीन टांके, हथेली पर खरोंच और शरीर में दर्द है जो साधारण चोट है। हालांकि जीआरपी इंस्पेक्टर लड़की के पास बरेली से लखनऊ का टिकट मिलने की बात कबूल कर रहे हैं। शुक्रवार सुबह दस बजे आरपीएफ इंस्पेक्टर विपिन सिसौदिया पीड़िता से मिलने जिला अस्पताल पहुंचे। सिसौदिया के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि कोच में एक युवक ने उसका गला दबाया, फिर वह बेहोश हो गई। होश आने पर वह गन्ने के खेत में थी। वहां वह कैसे पहुंची, उसे नहीं पता। यह सही है कि खेत में काम कर रहे लोगों ने यूपी-112 नंबर पर सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस ने ही युवती को सीएचसी में भर्ती कराया। बता दें कि गुरुवार देर रात इस बारे में जीआरपी से बात की गई थी तो उसने घटना की सूचना न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था।
अरुणिमा सिन्हा को ट्रेन से फेंकने के बाद भी किया था यही खेल
आठ साल पहले 11 अप्रैल, 2011 को पद्मावत एक्सप्रेस में यात्रा कर रही एथलीट अरुणिमा सिन्हा से भी बदमाशों ने लूट की कोशिश की थी। असफल होने पर बदमाशों ने पीतांबरपुर और चनेहटी (अब बरेली कैंट) स्टेशन के बीच ट्रेन से धक्का दे दिया था। वह चलती ट्रेन से गिरकर गंभीररूप से घायल हो गईं थीं। परिजनों ने उसे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उसका एक पैर काट दिया गया। जीआरपी चार दिन तक ट्रेन से गिरने की बात को बदलती रही। यहां तक कि जीआरपी हेड क्वार्टर को भी अरुणिमा के ट्रेन से खुद कूदने की रिपोर्ट भेज दी थी। जीआरपी के इस व्यवहार से अरुणिमा काफी आहत हुई थी। उन्होंने जीआरपी पर केस कर दिया जिसे वह सात साल बाद जीत गईं। इस बीच वह सभी चुनौतियों को मात देते हुए एवरेस्ट फतह करने वाली देश की पहली महिला बनीं।
मां बोली- बेटी से नहीं हो पा रही बात
देवरिया में मौजूद बिटिया की मां ने फोन पर बताया कि घटना के बाद जब बिटिया अस्पताल में भर्ती थी, तब उनकी उससे बात हुई थी। बिटिया ने बताया था कि ट्रेन में उससे छेड़खानी की गई। विरोध करने पर उसका मोबाइल और पर्स छीन लिया गया और उसे चलती ट्रेन से फेंक दिया गया। इससे उसके सिर और कमर में चोट आई है। बिटिया जब पीलीभीत से चली थी तब भी उससे बात हुई थी। उस वक्त बिटिया ने बताया था कि लखनऊ आकर वह नर्सिंग की ट्रेनिंग कर रही बड़ी बहन के पास रुकेगी। शुक्रवार करीब 11 बजे बिटिया को लखनऊ लेकर आ रहे उसके पीलीभीत में रहने वाले अंकल से बात हुई तो वह ट्रेन में थे। इसके बाद शायद उनका और बिटिया का मोबाइल डिस्चार्ज हो गया। लिहाजा फिर बात नहीं हो पाई। बिटिया का अब लखनऊ में इलाज कराएंगे।