बरेली। ई-रिक्शा लूट के मामले में बारादरी पुलिस ने पीड़ित को ही दो दिन थाने में बैठाकर प्रताड़ित किया। आरोप है कि रुपये न देने पर पुलिस ने उसे झूठी धारा लगाने के आरोप में जेल भेज दिया। पीड़ित ने एडीजी को पत्र देकर बारादरी के एसएसआई और दरोगा पर कार्रवाई की मांग की। एडीजी ने सीओ थ्री को जांच के आदेश दिए हैं।
पीलीभीत के बिलसंडा के गांव करेली निवासी संजीव कुमार का कहना है कि उसने 11 सितंबर को ई-रिक्शा खरीदा था। चार अक्तूबर रात आठ बजे उसका भाई अवनीश जोगीनवादा के राजीव को ले ई रिक्शा से जा रहा था। रास्ते में उसके भाई को नशीला पदार्थ खिलाकर ई-रिक्शा लूट लिया। जहरखुरान उसे बेहोशी की हालत में छोड़कर चले गए। वहां अंकुश नाम के एक व्यक्ति ने फोन करके उसे सूचना दी। इसके बाद उसे निजी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। अगले दिन बारादरी थाने से एसएसआई और एसआई ़राजीव के साथ अस्पताल आए और उसके भाई को थाने ले आए। आरोप है कि दोनों ने बीस हजार रुपये न देने पर उसे मारा पीटा और झूठे मुकदमे फंसाने की धमकी दी। सात अक्तूबर को झूठी धारा लगाकर उसे ही साजिश रचने में जेल भेज दिया। 31 अक्तूबर को जमानत होने के बाद उसने सीओ को कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आंवला में महिला गलत कार्रवाई बताकर अड़ी
आंवला के गांव पटपरागंज की निवासी नेमा देवी ने भी वहां के दरोगा के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी शुरू कर दी है। नेमा देवी के मुताबिक स्टे के बाद भी दरोगा ने उसे जेल भेज दिया। उसने शिकायत की तो दरोगा पर कार्रवाई के बजाय शहर की जगतपुर चौकी का प्रभारी बना दिया गया। पुलिस उसकी सुन नहीं रही है, वह कोर्ट में अवमानना का मामला दायर करेंगी। इस मामले में एसपी देहात का कहना था कि जगतपुर चौकी प्रभारी बदले पंद्रह दिन हो गए, इतने दिन बाद शिकायत क्यों की जा रही है? ये समझ से परे है।