बरेली। इतने दिनों से एटीएस के साथ लुकाछिपी का खेल खेल रहे टेरर फंडिंग के मास्टरमाइंड सदाकत ने आखिरकार फिर साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी सिर्फ वही है। उसने पुलिस और एसटीएफ की फील्डिंग को ऐसा धता बताया कि अफसर अब सिर्फ हाथ मलते नजर आ रहे हैं। खुद बरसों पुराने उस मामले में वह बरेली के कोर्ट में दाखिल हो गया, जिसमें जल्द फैसला आने की उम्मीद थी। एटीएस को उसकी कारगुजारी की भनक तक नहीं लगी। पुलिस के पास भी उसके मुकदमों की जानकारी नहीं थी।
नेपाल के खातों से भारत में हुई टेरर फंडिंग के मामले में लखीमपुर खीरी में रिपोर्ट होने के बाद से एटीएस सदाकत के पीछे लगी थी। उसके बाकी गुर्गे पकड़ लिए गए थे पर सदाकत हाथ नहीं आ रहा था। कुछ दिन पहले वह अपनी कार इज्जतनगर रेलवे की पार्किंग में खड़ी करके भाग गया। पुलिस और एटीएस को इसकी भी जानकारी नहीं हुई। जीआरपी ने कार को अपने कब्जे में लिया था। हाल ये था कि जब्त कार को देखने भी कोई एजेंसी नहीं गई। अब एटीएस सदाकत की तलाश में खीरी में कोर्ट के बाहर मोर्चा लगाए बैठी थी और वह वकील के जरिये बरेली सीजेएम के कोर्ट में सरेंडर कर गया। सोमवार दोपहर हलफनामा देने तक इज्जतनगर और प्रेमनगर थाना पुलिस को भी उसके सरेंडर होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दोपहर बाद मीडिया के जरिये ही पुलिस को पता लगा कि सदाकत के खिलाफ कोई मामला प्रेमनगर थाने में भी बरसों से दर्ज है।