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अपनों ने ही हड़प ली सदाकत की काली कमाई

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बरेली। नेपाली बैंक खाते हैक करने के साथ हवाला के धंधे से सदाकत ने कमाया तो बहुत कुछ लेकिन इसमें से ज्यादातर संपत्ति उसके करीबी लोगों ने ही हड़प ली। राजनीति में स्थापित होने के लिए भी उसने बिरादरी के लोगों पर जमकर पैसा बहाया मगर चुनाव नहीं जीत सका। सदाकत के फंसने के बाद उसके करीब रहे लोग ही सबसे ज्यादा खुश हैं।
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सदाकत ने गैरकानूनी धंधों से काफी पैसा इकट्ठा किया था। बस्ती में बिरादरी की ठीकठाक आबादी होने की वजह से ही उसने पार्षद बनकर राजनीति में आने का ख्वाब देखा जो चकनाचूर हो गया। इसके लिए उसने बिरादरी वालों को मकान बनाने, जमीन खरीदने और बेटियों की शादी के लिए खुले हाथों से मदद की फिर भी सिर्फ 250 वोट ही हाथ आए। बताया जाता है कि सदाकत ने बिरादरी के ही एक युवक को अपने धंधे से जोड़ने के बाद उसके नाम दो ट्रैक्टर, दो कारें और प्लॉट खरीदे थे। यह युवक उसका इतना विश्वासपात्र था कि उसने उसे ईंट भट्ठा और दूसरे कारोबारों में भी शामिल किया था।
कुछ समय बाद इस युवक से सदाकत का विवाद हो गया। इसके बाद सदाकत ने अपनी कारें, ट्रैक्टर और प्लॉट मांगे तो वह साफ मुकर गया। सदाकत ने इस युवक पर मुकदमा भी ठोका पर फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला। उसकी संपत्ति हड़पने वाले युवक ने कुछ रकम पुलिस पर खर्च करके सदाकत को ठेंगा दिखा दिया। अब सदाकत के कानून के शिकंजे में फंसने के बाद वे लोग खुश हैं जो उसी के जरिये लखपति बन गए।
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धंतिया में हलचल, इकट्ठे हुए सदाकत के गुर्गे
टेरर फंडिंग में मुख्य आरोपियों की धरपकड़ के बाद धंतिया गांव से सदाकत के खास गुर्गे फरार हो गए थे। एटीएस और पुलिस को वे अपने घरों में नहीं मिले। रात में ये लोग अपने घरों पर नहीं रुक रहे थे। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार दोपहर में इनमें से ज्यादातर लोगों ने गांव के ही एक बाहरी हिस्से में बैठक कर रणनीति बनाई कि गिरफ्तारी और एटीएस की कार्रवाई से बचने के लिए क्या किया जाए। इनमें कुछ लोग सीधे तौर पर सदाकत से जुड़े हैं तो कुछ उसके जरिये अकाउंट खुलवाकर फंस गए हैं।
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