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टेरर फंडिंग- हवाला धंधेबाजों से पुलिस की नजदीकी.. छानबीन कराएंगे एडीजी

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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बरेली। नेपाल से जुड़े टेरर फंडिंग का नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस और स्थानीय खुफिया एजेंसियां भी कठघरे में है। हाल ही के कुछ सालों में बदायूं के बिसौली से लेकर बरेली के इज्जतनगर इलाके तक तमाम गांवों में अचानक रईस होने वाले लोगों की तादाद लगातार बढ़ने के बाद भी पुलिस के स्तर से कभी कोई जांच-पड़ताल नहीं हुई।
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बिसौली के गांवों में कई बार नाइजीरियाई ठगों के पकड़े जाने के बाद भी कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे लोगों के साथ पुलिस की नजदीकियां जरूर गाहे-बगाहे चर्चा में आईं। लखनऊ एटीएस की कार्रवाई के बाद एडीजी अविनाश चंद्र ने हवाला के धंधे में चिह्नित लोगों के साथ संबंध रखने के मामले में पुलिस की भूमिका की छानबीन कराने का फैसला लिया है।
हवाला का खुला खेल फिर भी पुलिस बेखबर
बिसौली तहसील के दबतोरा गांव के नफीस के हवाला से अकूत संपत्ति जुटाने का पुलिस के पास पक्का इनपुट है। हाल ही में उसने बरेली में भी अपनी जड़ें जमाने के लिए यहां टीपीनगर इलाके में महंगी जमीन खरीदी है। बरेली में उसके तमाम टेंपो भी चल रहे हैं। पानी की तरह पैसा बहाकर उसने अपने परिवार के एक शख्स को प्रधानी जितवाई थी। सीबीआई कुछ समय पहले उसे हिरासत में ले चुकी है लेकिन फिलहाल वह बाहर है। दबतोरा के पड़ोस के ही संग्रामपुर के जकीउद्दीन और बरेली के सिरौली के याकूब बेग ने पिछले महीने प्रयागराज के रिटायर्ड जज राजेंद्र कुमार से 1.64 लाख रुपये एक फर्जी खाते में डलवा लिए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस तरह की ठगी का पैसा भी टेरर फंडिंग में इस्तेमाल किया जाता है। दस दिन पहले प्रयागराज पुलिस जकी को पकड़ ले गई थी। याकूब फरार है। पपगांव के हशमत को भी हवाला के आरोप में बरेली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
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एक फर्जी आईडी पर खुलते हैं र्कई अकाउंट
बरेली के परतापुर चौधरी, मोहनपुर, धंतिया समेत कई गांवों में हवाला का नेटवर्क जगजाहिर है। एक आईडी को कई जगह इस्तेमाल कर खाते खुलवाए जाते हैं। इन खातों में विदेश से आने वाले धन में दस फीसदी खाताधारक और पांच फीसदी हवाला धंधेबाज का होता है। बाकी रकम दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में भेज दी जाती है। कहा जाता है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की सेटिंग इतनी जबर्दस्त होती है कि बैंक चेक लगाने के बाद पेमेंट के लिए लाइन तक में नहीं लगना पड़ता। नोटों की गड्डियां बैग में पहले से अलग रखी होती हैं। पहले इन खातों में छोटा लेनदेन होता है और बाद में बड़ी रकम आने लगती है।

कोठियों में छापा पड़ता है, फिर कुछ नहीं होता
बिसौली के चर्चित गांवों में रातोंरात करोड़पति बने लोगों की कोठियां बनी हुई हैं। सीबीआई, एटीएस समेत कई प्रांतों की पुलिस की स्पेशल सेल अक्सर हवाला के धंधे में पकड़े गए लोगों का इन गांवों से कनेक्शन निकलने के बाद इधर रुख करती है। कई बार कुछेक को पकड़ लिया जाता है लेकिन इसके बाद साल दर साल जांच ही चलती रहती है। स्थानीय पुलिस कभी इन पर हाथ नहीं डालती। पुलिस पर अक्सर यह आरोप भी लगता रहता है कि बाहरी टीमों की दबिश से पहले ही वह इन धंधेबाजों को सूचना देकर भगा देती है।

टेरर फंडिंग और हवाला से जुड़े मामले की एटीएस जांच कर रही है। इन मामलों में स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी छानबीन कराई जाएगी। किसी इलाके में अगर अपराध हो रहा है तो पहली जवाबदेही स्थानीय पुलिस की ही बनती है। किस स्तर पर कमी है, इसे दिखवाएंगे। - अविनाश चंद्र , एडीजी बरेली जोन
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