बरेली। कोहाड़ापीर के सीमेंट-सरिया कारोबारी सिद्धार्थ रोहतगी की हत्या तय थी। पड़ोस के एक मैकेनिक की दुकान पर काम कर चुका सुमित जोशी अच्छी तरह जानता था कि सामने आते ही सिद्धार्थ उसे पहचान लेंगे, इसीलिए वह और उसका साथी राहुल के साथ लोहे की दो भारी-भरकम रॉड लेकर उनके गोदाम पर लूटपाट करने पहुंचा था। जैसा उसे अंदेशा था, सामने आते ही सिद्धार्थ ने उसे पहचान लिया और उसके बाद दोनों लोहे की रॉड से सिद्धार्थ की हत्या कर दी। यह वारदात रात 11 बजे तब हुई जब सिद्धार्थ गोदाम से घर के लिए निकलने वाले थे। अगर 15 मिनट पहले भी वह निकल जाते तो शायक उनकी जान बच जाती।
सोमवार रात कोहाड़ापीर इलाके में सिद्धार्थ रोहतगी की उनके ही गोदाम में सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। रात भर घर न आने और फोन पर संपर्क न होने से परेशान उनके ससुर ने सुबह नौकर को गोदाम की दीवार पर चढ़ाकर अंदर भेजा तो लहूलुहान हालत में शव पड़ा मिला। मंगलवार देर रात पुलिस ने इज्जतनगर के बैरियर टू इलाके में मुठभेड़ के दौरान दुर्गानगर के सुमित जोशी और बहेड़ी के गांव चुड़ैली के राहुल को सिद्धार्थ की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
बुधवार को एसएसपी शैलेश कुमर पांडेय ने पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस ने दोनों के पास से लूटे गए 40 हजार रुपये के साथ कुल 41180 रुपये, एक बाइक, दो तमंचे, दो मोबाइल, कैमरे, सिद्धार्थ की बैंक पासबुक और चेकबुक, प्रेस, शुगर जांच की मशीन और चाबी का गुच्छा आदि सामान बरामद कियाहै। लोहे की वे दो रॉड भी बरामद हो गईं जिनसे हत्या की गई। एसएसपी ने बताया कि सुमित तीन साल पहले तक सिद्धार्थ के पड़ोस की ऑटोमोबाइल शॉप में काम कर चुका है। नौ साल की यहां नौकरी की वजह से सिद्धार्थ से अच्छी तरह परिचित था। उसका दोस्त राहुल हाल ही में इज्जतनगर के तुलाशेरपुर गांव आकर बस गया था और सौ फुटा रोड पर पंक्चर बनाता था। सुमित को पता था कि सिद्धार्थ के गोदाम में अक्सर लाखों का कैश रहता है। उसे शक था कि सामने आने पर सिद्धार्थ उसे पहचान लेंगे, इसीलिए दोनों लोहे की रॉड साथ लेकर लूटपाट करने गए थे। सिद्धार्थ के सामने आते ही उन्होंने हमला कर दिया और हत्या के बाद जो भी मिला, उसे बटोर ले गए। दोनों का कोई पुराना क्राइम रिकार्ड फिलहाल नहीं मिला। जेल भेजने से पहले पुलिस दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर ले गई। दोनों ने पुलिस को बताया कि वे किधर से आए और निकले थे।
सही खुलासा, सिद्धार्थ का परिवार संतुष्ट
अजीत सक्सेना और उनके परिवार से भी पुलिस ने आरोपियों को मिलवाकर साक्ष्य दिखाए। अजीत कार्रवाई से संतुष्ट दिखे। कहा कि खुलासा बिल्कुल सही हुआ है। हालांकि उन्हें अफसोस था कि इस घटना से उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई।
तीनों खुलासों के लिए 75 हजार ईनाम
एसपी सिटी और एसपी देहात के साथ ही एसपी क्राइम की टीम ने बेहतर काम करके तीनों हत्याकांडों का सटीक खुलासा किया है। कई थानों की पुलिस अलग-अलग काम में लगाई गई थी। तीनों टीमों को 25-25 हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा। अधिकारियों से मेहनती स्टाफ को प्रशस्ति पत्र दिलाने का अनुरोध करेंगे। - शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी