बरेली। गरगइया और सरनिया में परिसंपत्तियों के अधिक मूल्यांकन का सत्यापन किए जाने पर आरोपों से घिरे लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं पर अब कार्रवाई का शिकंजा कसेगा। निलंबन के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया में है। चार्जशीट तैयार हो रही है। चार्जशीट अभियंताओं को देकर जल्द ही जवाब मांगा जाएगा। इस संबंध में अब तक हुई दो जांच रिपोर्टों के हवाले से मुख्य अभियंता ने चार्जशीट तैयार कराई है। इसमें अभी कुछ साक्ष्य और संलग्न किए जाने हैं। साक्ष्यों को एकत्र करने के साध ही चार्जशीट जारी होगी। इसमें प्रत्येक आरोप का जवाब मांगा जाएगा। जवाब के परीक्षण के बाद अगली कार्रवाई होगी।
लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता (अब सेवानिवृत्त) नारायण सिंह, सहायक अभियंता रहीं स्नेहलता श्रीवास्तव, अवर अभियंता सुरेंद्र सिंह, अंकित सक्सेना, राकेश कुमार और अमीन शिवशंकर कार्रवाई के घेरे में हैं। शासन ने सेवारत अभियंताओं को निलंबित किया था। इसमें कोर्ट ने अवर अभियंताओं की बहाली का आदेश पारित किया, लेकिन जांच जारी है। जांच के क्रम में पांच अभियंताओं और एक अमीन के खिलाफ चार्जशीट तैयार हो रही है। चार्जशीट में मुख्य रूप से परिसंपत्तियों के मूल्यांकन से उठे सवालों के जवाब मांगे जाने हैं। शासन ने सेवारत अभियंताओं के निलंबन के बाद मुख्य अभियंता अजय कुमार को जांच सौंपी है। उन्होंने जिला एवं मंडल स्तरीय जांच समितियों की रिपोर्ट को आरोप पत्र का आधार बनाया है।
चार्जशीट तैयार करने के लिए आरोप तय किए जा रहे हैं। जल्द ही पांच अभियंताओं और एक अमीन को चार्जशीट दे दी जाएगी। - अजय कुमार, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग
यह हैं मामले, जिनके देने हैं अभियंताओं को जवाब
सवाल नंबर एक : गरगइया में स्क्रैल वैल्यू को क्यों नहीं किया कम
बरेली-सितारगंज हाईवे के गरगईया में जिस परिसंपत्ति का मूल्यांकन 2.81 करोड़ किया गया। उसे चार साल पुराना निर्माण दर्शाया गया था लेकिन गूगल मैप से चार साल पुराने होने की पुष्टि नहीं हो सकी। डीएम व कमिश्नर की ओर से कराई गई जांच रिपोर्ट में माना गया है कि अधिक मूल्यांकन हासिल करने की नीयत से कुछ लोगों ने तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत करके पहले निर्माण कराया और इसके बाद मूल्यांकन अधिक कराया। जब गरगइया में जांच समिति पहुंची तो मौके पर वह ढांचा नहीं मिला, जिसके बदले भुगतान किया गया था। मूल्यांकन राशि से ढांचे की स्क्रैप वैल्यू कम की जानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सवाल नंबर दो : एक ही परिसंपत्ति 2.95 करोड़ से घटकर कैसे हो गई 25 लाख की
रिंग रोड परियोजना में सरनिया के गाटा संख्या 156 पर बने गोदाम का एनएचएआई की एजेंसी ने 2.95 करोड़ रुपये का मूल्यांकन मुआवजा तय किया था, लेकिन लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अभियंताओं ने इसका सत्यापन कर भुगतान के लिए आगे बढ़ा दिया। भुगतान से पहले मामला तब खुला जब लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार अग्रवाल ने इसी परिसंपत्ति का मूल्यांकन 25 लाख कर दिया। इसके बाद इसी विभाग के दो अधिशासी अभियंताओं की संयुक्त जांच टीम ने मूल्यांकन 1.97 करोड़ रुपये किया। इस स्थिति में अब अभियंताओं को जवाब देना है कि उन्होंने किस आधार पर मूल्यांकन का सत्यापन किया था।
अमर उजाला ब्यूरो