बरेली। बहेड़ी की ग्राम पंचायत अंबरपुर में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से एक साल पहले गोशाला का निर्माण कराया गया। निचली जमीन पर निर्माण होने की वजह से बरसात में यहां काफी जलभराव हो जाता है। इस वजह से यह आज तक संचालित नहीं हो सकी। इसको लेकर कोई सवाल खड़ा हो, इससे पहले ग्राम प्रधान ने प्रशासन से ही जवाब मांग लिया है। उनका कहना है कि इसमें आठ माह पशुओं को रखा जा सकता है, लेकिन बरसात में उनको कहां ले जाएं?
ग्राम पंचायत अंबरपुर में अक्तूबर 2023 में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ ने गोआश्रय स्थल का निर्माण कराया था। निर्माण जून 2024 में पूरा हुआ, पर इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। पिछले साल यहां 20 से 25 गोवंशीय पशु रखे गए थे। बारिश के दौरान डैम से पानी छोड़ने जाने पर यहां छह से सात फुट तक पानी भर गया था। तब बमुश्किल पशुओं को वहां से निकाला गया था।
ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर राजस्व विभाग की टीम जमीन की पैमाइश करती है। की नापजोख करते हैं । इसकी रिपोर्ट एसडीएम के जरिये डीएलआरसी को भेजी जाती है। जमीन की श्रेणी और उसकी वास्तविक स्थिति आदि ठीक होने पर वहां से रिपोर्ट एडीएम के जरिये डीएम को भेजी जाती है। डीएम के हस्तक्षेप पर संबंधित जमीन पशुपालन विभाग के नाम की जाती है। शासन की स्वीकृति के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है। जाहिर है कि अगर इस प्रक्रिया का ठीक से पालन किया गया होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से 1.60 करोड़ रुपये डूब गए।
ग्राम पंचायत अंबरपुर में बनाए गए गो आश्रय स्थल में बरसात के मौसम में जलभराव हो जाता है। बाढ़ का पानी भी आ जाता है। इसलिए वहां पशुओं को नहीं रखा गया है। - डॉ. मनमोहन पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी