फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: गाय-भैंस बनेंगी 'सरोगेट मदर', सात टेस्ट ट्यूब बेबी को देंगी जन्म, देश में पहली बार हुआ ऐसा

Sun, 13 Jul 2025 03:04 PM IST
मुकेश कुमार अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

आईवीआरआई ने पहली बार सात गाय-भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण में सफलता हासिल की। ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से उन्नत नस्ल के पशुओं का जन्म संभव होगा, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। यह उपलब्धि पशुधन क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।

विज्ञापन
शोध करते वैज्ञानिक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने छह गाय और एक भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण का प्रत्यारोपण किया है। गर्भकाल पूरा होने पर सरोगेट मदर से टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म होगा।

विज्ञापन


वैज्ञानिकों का दावा है कि देश में पहली बार एक साथ सात टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए हैं। इससे पशुओं की उन्नत नस्ल विकसित करने में मदद मिलेगी। देश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। 

पशु पुनरुत्पादन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेश कुमार के मुताबिक, पांच साहीवाल, एक थारपरकर नस्ल की गाय में लैब में विकसित भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया है। मुर्रा नस्ल की भैंस में टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण में सीआरसी पंतनगर के बाद अब आईवीआरआई को भी सफलता मिली है। गायें सात माह और भैंस नौ माह बाद टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म देंगी। 
विज्ञापन


पशुओं में भ्रूण प्रत्यारोपण के लिए आईवीआरआई ने 2018 में शोध शुरू किया था। तब सुपर ओवलेशन विधि से मादा के जननांग में ही भ्रूण बनाकर उसे सात दिन बाद सरोगेट मदर में प्रत्यारोपित करते थे। इसके जरिये संस्थान में साहीवाल नस्ल के 30 बछड़े-बछिया पैदा हुईं। 

विज्ञापन

2022 में टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए शुरू हुआ शोध 
2022 में ओवम पिकअप (ओपीयू) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) पर शोध शुरू हुआ। ओपीयू तकनीक में पशु से परिपक्व अंडाणु एकत्र कर उसे प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से शुक्राणु से निषेचित कराते हैं। प्राप्त भ्रूण को सरोगेट पशु के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। 

सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से गाय, भैंस वर्ष में सिर्फ एक बार ही गर्भधारण कर सकती हैं, पर ओपीयू आईवीएफ तकनीक से एक भैंस से साल में दस और गाय से 20 भ्रूण तैयार किए जा सकते हैं। 

इस प्रक्रिया से तैयार भ्रूण की गुणवत्ता अधिक होती है। पशुओं की उन्नत नस्ल के विकास से किसानों को फायदा होगा। पशुओं की दूध देने की क्षमता भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें