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Bareilly News: गोमूत्र अर्क जीवाणुओं पर 80 फीसदी प्रभावी, अन्य उत्पादों के औषधीय गुण सीमित

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बरेली। मूत्र-आधारित उत्पादों की रोगाणुरोधी क्षमता के अध्ययन में गोमूत्र अर्क का प्रभाव बेहतर मिला, पर इससे बने अन्य उत्पादों का प्रभाव सीमित रहा। रिपोर्ट में उपयोग की संस्तुति से पूर्व प्रभावशीलता का विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की सिफारिश की गई है।
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के महामारी विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीआर सिंह के मुताबिक, मूत्र-आधारित उत्पादों में डिस्टिलेट (अर्क), पाउडर और सतही कीटाणुनाशकों का परीक्षण 912 सूक्ष्मजीवों पर किया। इनमें 149 प्रजातियों, उप-प्रजातियों के क्लीनिकल, पर्यावरणीय और रेफरेंस स्ट्रेन शामिल थे। अध्ययन के दौरान गोमूत्र अर्क अन्य उत्पादों की तुलना में अधिक प्रभावी रहा, जबकि अन्य उत्पादों का रोगाणुरोधी प्रभाव सीमित रहा। रिकॉन्स्टिट्यूटेड पाउडर आधारित उत्पाद जीवाणुओं पर बेअसर रहे। जीवाणुओं पर सतही कीटाणुनाशक दवा के प्रभाव का प्रमाण नहीं मिला। अध्ययन रिसर्च गेट जर्नल में प्रकाशित है। अध्ययन में डॉ. हिमानी अग्री, कार्तिकेयन रविचंद्रन, आकांक्षा यादव का सहयोग रहा।

गोमूत्र का अर्क 80 फीसदी प्रभावी
अन्य उत्पाद 33 फीसदी पर सिमटे
डॉ. सिंह के मुताबिक, अध्ययन में कुल 912 सूक्ष्मजीवों (149 प्रजातियां, 49 वंश) पर गोमूत्र समेत अन्य पशुओं और मनुष्यों के मूत्र का परीक्षण हुआ। इनमें 369 नमूने क्लीनिकल, 496 पर्यावरणीय स्रोतों और 47 संदर्भ (रेफरेंस) स्ट्रेन थे। सर्वाधिक प्रभाव गोमूत्र डिस्टिलेट (अर्क) का मिला। साहीवाल नस्ल की बछियों के डिस्टिलेट ने 79.28 फीसदी, थारपारकर नस्ल की बछियों के डिस्टिलेट ने 74.56 फीसदी सूक्ष्मजीव खत्म किए। विभिन्न ब्रांड के गोमूत्र की प्रभावशीलता 18.5 से 33.06 फीसदी के बीच रही।
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गौनाइल पांच फीसदी कारगर, पानी मिलाने पर बेअसर
डॉ. सिंह के मुताबिक, गोमूत्र से बने सतही कीटाणुनाशक उत्पाद गौनाइल और परी-डी 100 सिर्फ पांच फीसदी सूक्ष्मजीवों पर प्रभावी रहे। पानी मिलाकर इन्हें दो गुना से ज्यादा पतला करने पर ये बेअसर रहे। गौमूत्र पाउडर से बने घोल में कोई रोगाणुरोधी प्रभाव नहीं मिला। दूसरी ओर, भैंस के डिस्टिलेट का प्रभाव 57.29 फीसदी, मानव मूत्र का 4.41 फीसदी, कुत्ते के मूत्र में कोई रोगाणुरोधी प्रभाव नहीं मिला।
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