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कोविड अस्पतालों में आयुष्यमान योजना का उड़ाया जा रहा माखौल

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बरेली। कोविड संक्रमितों की ओर से निजी कोविड अस्पतालों में वसूली और ठीक इलाज न होने से मौत के आरोप थम नहीं रहे हैं। अब नया मामला उजागर हुआ है। कोविड अस्पतालों में भर्ती आयुष्मान कार्ड धारकों का आरोप है कि अस्पताल का स्टाफ उनसे अभद्र व्यवहार करता है। जांच के लिए सैंपल लेते हैं मगर रिपोर्ट नहीं देते। आशंका जताई कि इलाज के नाम पर फर्जी बिल बनाकर अस्पताल सरकारी खजाना खाली कर रहे हैं।
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कालीबाड़ी की रहने वाली एक संक्रमित महिला शनिवार को डिस्चार्ज हुईं। उनके मुताबिक जब अस्पताल में भर्ती थीं तो उनका सैंपल लिया गया मगर रिपोर्ट नहीं बताई गई। डिस्चार्ज करने के दौरान जब उन्होंने जांच रिपोर्ट और इलाज संबंधी रिपोर्ट मांगी तो स्टाफ अभद्र व्यवहार करने लगा। काफी देर तक चले हंगामे के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी। साथ ही, होम क्वारंटीन रहने के दौरान क्या दवाएं लेनी हैं और खानपान क्या रहेगा, इसका भी कोई परामर्श नहीं दिया। उन्होंने आशंका जताई है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर फर्जी बिल बनाकर शासन से भुगतान लिया जा रहा है।
कार्ड धारकों के इलाज का सरकार करती है भुगतान
आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के संक्रमित होने पर उनका इलाज निशुल्क होता है। ऐसे में आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज के नाम पर अस्पतालों की ओर से खेल की आशंका जताई जा रही है। तमाम संक्रमित कार्ड धारक ऐसे हैं जो अस्पताल में भर्ती हैं मगर उनका इलाज नहीं हो रहा। सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं, मगर अस्पताल मोटा बिल बना रहे हैं। इसका संक्रमितों को पता तक नहीं होता। डिस्चार्ज के दौरान भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। कोई रुपया जमा नहीं होता, इसलिए खर्च का कोई मेसेज भी नहीं आता। उधर, अस्पताल लंबा चौड़ा बिल बनाकर उसका सरकार से भुगतान ले रहे हैं।
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मामला संज्ञान में नहीं है। आयुष्मान कार्ड से भुगतान से पहले अस्पताल को मरीज के इलाज के सभी दस्तावेज देने होते हैं तभी भुगतान होता है। अगर किसी तरह की कोई समस्या है तो शिकायत करें, जांच कराई जाएगी। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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