कोर्ट की टिप्पणी : दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए
सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मशास्त्रों में यह श्लोक बार-बार प्रयोग किया जाता है कि शठे शाठ्यम समाचरेत। अर्थत दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए। आचार्य चाणक्य भी इस नीति से सहमति रखते थे। दोषियों ने निर्ममता से जसवंत को चोट पहुंचाई। उसका इलाज लंबे समय तक चला। उसकी आंखों की रोशनी चली गई। वह खुद खाना भी नहीं खा सकता। ठीक से बोल भी नहीं सकता। दोषियों ने उसको जीवनभर के लिए लाचार कर दिया। घटना के समय उसकी आयु 24 वर्ष थी। उसका अभी लंबा जीवन है।