समाज को जाएगा यह संदेश
कोर्ट ने सजा सुनाते समय रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख कर राम-लक्ष्मण और राम-भरत के पारस्परिक प्रेम का जिक्र किया। कहा कि राम को रघुवीर के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन इस रघुवीर ने इसके विपरीत कृत्य किया है।
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दया एक मानवीय गुण है, लेकिन इस मामले में दोषियों में इसका घोर अभाव है। अगर ऐसे व्यक्तियों को मृत्युदंड नहीं दिया जाता है, तो कोई भी भाई संपत्ति के लालच में भाई की हत्या कर देगा। यह घटना रिश्तों को भी तार-तार करती है। मृत्युदंड से ही ऐसे व्यक्तियों से समाज को मुक्ति दिलाई जा सकती है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश भी जाएगा। कोर्ट ने कहा कि रघुवीर सिंह एवं मोनू को तब तक फंदे पर लटकाया जाए, जब तक मृत्यु न हो जाए।