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तस्लीमा नसरीन के खिलाफ दर्ज मुकदमा खारिज

Thu, 22 Jan 2015 01:27 AM IST
बरेली
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मुफ्तियों और मौलवियों के बारे में किए गए एक ट्वीट पर बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे में पुलिस की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज मिश्रा ने स्वीकार कर वादी की आपत्ति को खारिज कर दिया।
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आला हजरत दरगाह के तत्कालीन सज्जादानशीन सुब्हान रजा खां के बेटे अहसन रजा खां ने थाना कोतवाली में छह नवंबर 2013 को अखबार में छपी एक खबर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अहसन रजा खां अब खुद सज्जादानशीन हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि अखबार में छपी खबर के मुताबिक तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट किया था कि भारत में महिलाओं के खिलाफ फतवा जारी करने वाले अपराधियों को दंड नही मिलता। उनका कहना था कि मुफ्ती हदीस और कुरान की रोशनी में फतवा जारी करते हैं। इसमें कुछ मनगढंत नहीं होता। चूंकि वह इस्लाम धर्म के अनुयायी हैं इसलिए तस्लीमा के ट्वीट से उनकी धार्मिक भावनाऐं आहत हुई है। इस मुकदमे में विवेचना अधिकारी ने तस्लीमा नसरीन के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने की बात कहते हुए अदालत में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। पिछले दिनों फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ अहसन रजा खां ने अदालत में आपत्ति दाखिल की  थी। अदालत ने अहसन रजा के वकील चंद्रशेखर की दलीलें सुनने के साथ फाइनल रिपोर्ट का अवलोकन किया और उसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा दी गई विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए वादी की ओर से दाखिल आपत्ति को निरस्त कर दिया।

यह था मामला
तस्लीमा नसरीन का विवादित ट्वीट आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल के अध्यक्ष तौकीर रजा खां से मुलाकात पर था। तस्लीमा ने कहा था कि राजनेताओं को फतवे जारी करने वाले फंडामेंटलिस्ट से मिलने के बजाय आम मुसलमानों से मिलना चाहिए क्योंकि ऐसे विधि विरुद्ध कार्य करने वाले लोग आम मुस्लिम वर्ग का प्रतिनिधित्व नही करते। ये धर्मगुरु आम मुस्लिम समुदाय की शिक्षा या उन्नति के बारे में भी नहीं विचार करते।
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मेरे विचार से समग्र रुप से पढ़े जाने पर उपरोक्त ट्वीट से कही ऐसा प्रकट नही होता है कि विपक्षी द्वारा किसी वर्ग के  धार्मिक विश्वासों के विरुद्ध मुफ्तियों और मौलवियों को अपराधी की संज्ञा दी गई हो। भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। प्रजातंत्रात्मक देश में अपने समुचित विचारों को व्यक्त करने का प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। प्रजातंत्रात्मक देश में अपने विचारों को व्यक्त करना तथा सामान्य बिंदुओं पर जनरल डिसक्शन आवश्यक है। - पंकज मिश्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
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