लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के बहुचर्चित मामले में एडीजे प्रथम कुलदीप सक्सेना ने सुनवाई के बाद जालसाजी के आरोपी मुमताज की जमानत अर्जी खारिज कर दी है
जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद त्रिपाठी ने बताया संगठित गिरोह बनाकर आरोपियों ने नेपाल राष्ट्र बैंक की वेबसाइट हैक कर लाखों रुपये हड़प कर लिए थे ऑनलाइन ट्रांजक्शन के माध्यम से 50 लाख से अधिक की रकम इधर से उधर की गई। हाई प्रोफाइल मामले की जांच के बाद यूपी एसटीएफ ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है आरोपी मुमताज की जमानत की पहली अर्जी पूर्व में ही खारिज की जा चुकी है। नए सिरे से जमानत की सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सुनवाई के बाद अदालत में बचाव पक्ष की ओर से पेश की गई जमानत अर्जी खारिज कर दी।
नेपाल में खाता धारकों को तैयार कर मंगवाता था पैसा
कोतवाली तिकुनियां के गांव डांगा निवासी मुमताज ने टेरर फंडिंग मामले में अपने मामा और बहनोई को भी शामिल कर रखा था। एटीएस के मुताबिक मुमताज ही नेपाल में खाता धारकों को तैयार करता। उनके खाते में विदेशों से रकम आने के बाद निकलवाकर भिजवाता था।
गांव डांगा भारत-नेपाल सीमा से करीब तीन किलोमीटर पहले है। मुमताज साइकिल से नेपाल के भजनी, टीकापुर, पिरथीपुरवा आदि जगहों पर फेरी लगाकर आलू-प्याज आदि की बेचता था। टेरर फंडिंग का खुलासा होने से छह महीने पहले उसने फेरी भी लगाना बंद कर दिया था। उसका गुलरिया घाट होकर उसका अक्सर नेपाल आना-जाना रहता था। खुलासे के दौरान एसपी पूनम ने बताया था कि मुमताज अपने मामा बरेली के थाना इज्जतनगर के गांव परतापुर चौधरी निवासी उम्मेद अली और सलीम सलमानी बहनोई को भी इस धंधे में लगाया था। विदेशों से पैसा खाते में आने के बाद उसे निकलवाकर वह मामा, बहनोई और अन्य सदस्यों के जरिए लखीमपुर होते हुए भिजवाता था।