न्यायालय ने बरामदगी पर भी उठाए सवाल
न्यायालय ने मुकदमे के विवेचक धनंजय सिंह की विवेचना पर सवाल खड़े किए। विवेचक ने जकी अहमद और चांद बाबू से बरामदगी के समय न स्वतंत्र गवाह बनाए और न फर्द बयान लिखा गया। विवेचक ने घायलों के कपड़े का भी माल मुकदमा नहीं बनाया गया। विवेचक ने घायलों के बयान कराने में भी लापरवाही बरती। वहीं वादी और गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था।
25-25 हजार के इनामी घोषित कर पुलिस ने मारी थी गोली
जकी के खिलाफ आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई रवि दिवाकर अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक के कोर्ट में चल रही थी। न्यायालय ने कलीम हैदर, मंजर अली, अजहर अली, जकी हैदर, सरवर अली, जैफी, जरी हैदर व चांद बाबू को दोषमुक्त कर दिया। चांद बाबू को आर्म्स एक्ट मामले में भी दोषमुक्त किया गया। जेल में निरुद्ध कलीम हैदर और मंजर अली को रिहा करने के आदेश दिए गए।