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Bareilly News: हौसला, जागरूकता और फैक्टर आठ... हीमोफीलिया को दे रहे मात

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बरेली। हीमोफीलिया बेशक गंभीर बीमारी है, पर इसका मतलब यह नहीं कि इसके आगे हथियार डाल दिया जाए। जागरूकता, हौसला और फैक्टर की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। दो दशक पूर्व तक जांच और इलाज के अभाव में मरीजों की जीवनरेखा महज 20 वर्ष थी, अब चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ यह बढ़कर 50 के पार तक जा पहुंची है। जिला अस्पताल की एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया रक्तस्राव से संबंधित एक आनुवंशिक रोग है। इसमें खून के धक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। चोट लगने के बाद रोगी को अन्य मरीजों की तुलना में ज्यादा खून बहता है। इससे मौत की आशंका होती है, पर तभी फैक्टर लगा दिया जाए तो थक्के बनने से खून का बहना बंद हो जाता है। जिला अस्पताल में पंजीकृत हीमोफीलिया पीड़ितों का निशुल्क इलाज होता है। दवाएं और फैक्टर समेत जरूरत पड़ने अस्पताल प्रशासन रक्त भी मुहैया होता है।
बरेली मंडल में 95 फीसदी मरीज फैक्टर आठ के
हीमोफीलिया जन कल्याण सोसायटी की अध्यक्ष रेखा रानी के मुताबिक, बरेली मंडल में हीमोफीलिया के करीब ढाई सौ मरीज पंजीकृत हैं। कभी-कभी फैक्टर की उपलब्धता कम होने पर मरीज को परेशान होना पड़ता है। अपील की है कि फैक्टर कम होने पर नया स्टॉक मंगा लिया जाए। खत्म होने पर इंतजार तकलीफदेह होता है। रेखा रानी के मुताबिक, हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर आठ की कमी होती है। बरेली मंडल में 95 फीसदी इसी के मरीज है। फैक्टर बेहद कम होने पर हीमोफीलिया बी होता है।
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जानिए, क्या होता है फैक्टर
रक्त का थक्का जमाने वाले तत्व को फैक्टर कहा जाता है। वर्तमान में जो फैक्टर लगता है उसका प्रभाव 12 घंटे रहता है, जबकि हाल ही में विदेश में ईजाद फैक्टर का प्रभाव माहभर होने की बात कही जा रही है। मंडल के हीमोफीलिया मरीज इसकी मांग कर रहे हैं। ब्यूरो
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