बरेली। विद्युत निगम में अभियंताओं के भ्रष्टाचार का खामियाजा शहर के लोगों को बिजली कटौती के रूप में भुगतना पड़ रहा है। चार माह में भ्रष्टाचार के पांच बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों से बड़े अभियंताओं के नाम भी जुड़ रहे हैं, पर इनको रफा-दफा करने की साजिश चल रही है। चार माह में पांच जांच कमेटियां बनाई गई हैं। अब तक कोई जांच कमेटी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। संवाद
मीटरों की बरामदगी में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं
केस-1
विजिलेंस टीम ने 19 मार्च को फरीदपुर में छापा मारकर संविदा लाइनमैन के घर से 98 मीटर बरामद किए थे। यहां बिजली मीटरों में गड़बड़ी कर विद्युत निगम को चूना लगाया जा रहा था। इस मामले की प्राथमिक जांच में कुछ जेई, एसडीई और एक्सईएन के नाम भी प्रकाश में आए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर लाइनमैन की संविदा समाप्त कर जांच कमेटी गठित कर दी गई। जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
32 लाख का बिल घोटाला, सिर्फ लिपिक पर कार्रवाई
केस-2
उपभोक्ताओं से नकद धनराशि लेकर फर्जी चेकों के जरिये बिल जमा कर विद्युत निगम को 31 लाख का चूना लगाने के मामले में भी अंतरिम जांच कमेटी की जांच अब तक पूरी नहीं हुई। यह मामला छह अप्रैल को सामने आया था। वर्टिकल-2 में चेक जमा किए गए थे। बैंक ने जब फर्जी चेक विद्युत निगम को लौटाए तो कैशियर को निलंबित कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जुर्माना निर्धारण में घपला, कार्रवाई लिपिक तक सीमित रही
केस-3
बिजली चोरी के मामलों में जुर्माना निर्धारण करने में कई लाख रुपये का घपला सामने आने के बाद लिपिक निमिष कुमार का तबादला बरेली से आंवला उपकेंद्र कर दिया गया। इस मामले में भी अब तक किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। जांच कमेटी बनाने के बाद अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा कर दिया। यह मामला फरवरी में सामने आया था।
रिश्वतखोरी के मामले में भी फंसाई जा रही जांच
केस-चार
हाल ही में अधिशासी अभियंता (33 केवी वर्टिकल) महावीर सिंह का रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ था। स्थानीय स्तर पर जांच कमेटी गठित कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रबंध निदेशक ने संज्ञान लेते हुए महावीर सिंह को निलंबित कर दिया। गौर करने की बात यह है कि रिश्वत देने वाला भी एक अभियंता है। उसके संबंध प्रदेश स्तर के एक शीर्ष अधिकारी के गुरु से हैं। ऐसे में उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।
पांच करोड़ से लाइन शिफ्टिंग के काम में भी गोलमाल
केस-पांच
बरेली-पीलीभीत हाईवे पर पांच करोड़ रुपये से कराए गए लाइन शिफ्टिंग के काम में भी भ्रष्टाचार हो गया। पुराना सामान लगाकर बिना निरीक्षण और परीक्षण के लाइन शिफ्ट कर दी गईं। मामला अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सामने आया तो इसकी जांच के लिए भी कमेटी बना दी गई। यह जांच कमेटी भी अब तक रिपोर्ट नहीं दे सकी है। ऐसे में इस प्रकरण को भी रफा-दफा किए जाने की तैयारी है।
पुराने मामले की जानकारी नहीं है। इनको दिखवाएंगे और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। अभियंता के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले की जांच चल रही है, उसकी रिपोर्ट दो दिन में देने के लिए कहा है। - ज्ञान प्रकाश, मुख्य अभियंता