फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना : संक्रमित जवानों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे

विज्ञापन
demo photo - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विदेश से युद्धाभ्यास कर लौटे सेना के आठ जवान मिले हैं कोरोना संक्रमित

बरेली। दो दिन पहले संक्रमित मिले सेना के सभी आठ जवानों में कोरोना के स्वरूप के पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी। जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने जवानों के सैंपल लेकर बृहस्पतिवार को जांच के लिए लखनऊ भेजे थे। शुक्रवार को सैंपल लखनऊ से दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी लैब भेज दिए गए हैं।
विज्ञापन

दरअसल, दूसरे देशों में कोरोना के तेजी से बढ़ रहे मामलों में ज्यादातर की जांच में कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट मिला है। इसे संक्रमण की तीसरी लहर की बड़ी वजह माना जा रहा है। पिछले दिनों बरेली सैन्य यूनिट के आठ जवान कई देशों में युद्धाभ्यास के लिए भेजे गए थे। लौटने पर नियमानुसार उनकी जांच की गई तो सभी संक्रमित मिले। जिला प्रशासन ने सैन्य अफसरों से संपर्क किया तो संक्रमित जवानों के विदेश से लौटने की जानकारी मिली। इस पर जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को उनकी जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि सभी जवानों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए लखनऊ लैब भेजे गए थे। वहां फिलहाल जांच नहीं हो रही है, लिहाजा वहां से सैंपल जांच के लिए दिल्ली स्थित लैब भेजे गए हैं। दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी। सभी जवान मिलिट्री अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में आइसोलेट हैं।

तेजी से बन जाती हैं वायरस की हजारों कॉपी

माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक, वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते हैं, ताकि उन्हें खत्म न किया जा सके। कहा, म्यूटेशन के दौरान कभी कभार वायरस पहले से कमजोर हो जाता है तो कई बार वह और भी खतरनाक हो जाता है। ऐसे में जब वायरस शरीर की किसी कोशिका पर हमला करता है तो कोशिका तेजी से वायरस की हजारों कॉपी बना देती है। इससे शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्द गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है। कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस स्वरूप कुछ इसी तरह कार्य करता है।

जीनोम सीक्वेंसिंग से ही पता चलता है स्वरूप

डॉ. गोयल के मुताबिक वायरस के स्वरूप में बदलाव होने पर कई बार उपलब्ध दवाएं या वैक्सीन भी प्रभावी नहीं हो पाती हैं, इसलिए दवा, वैक्सीन के फॉर्मूले में बदलाव किया जाता है। ऐसे में वायरस के स्वरूप की जानकारी के लिए ही जीनोम सीक्वेंसिंग की जाती है। कहा, मानव शरीर डीएनए से मिलकर बनता है, वैसे ही वायरस भी डीएनए या आरएनए से बनता है। कोरोना वायरस आरएनए से बना है। जीनोम सीक्वेंसिंग से इसी आरएनए की जेनेटिक जानकारी मिलती है। इससे पता चलता है कि वायरस कैसा है, कैसे हमला करता है और कैसे बढ़ता है, यही पता करना सीक्वेंसिंग कहलाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें