पिछले साल बढ़ा था संस्थागत प्रसव का ग्राफ, इस बार घरों में हुए तीन गुना प्रसव
बरेली। प्रसव के दौरान गर्भवती और नवजात के जीवन को कोई संकट न हो, इसके लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार इसके लिए कई योजनाएं भी चला रही है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने इन योजनाओं का बंटाधार कर दिया। सरकारी और निजी अस्पतालों की अपेक्षा घरों पर तीन गुना से अधिक प्रसव होने से अफसर भी हैरान हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में प्रसव के दौरान संक्रमित होने की आशंका और लॉकडाउन की वजह से घरों में प्रसव बढ़े हैं।
कोरोना की पहली लहर में निजी अस्पतालों में गर्भवती के सिजेरियन या सामान्य प्रसव कराने पर भी हजारों का बिल वसूला गया। वहीं, कुछ निजी अस्पतालों ने संक्रमण की आशंका से प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवतियों को गेट से ही वापस कर दिया गया। वक्त पर इलाज न मिल पाने से एक गर्भवती की तो मौत भी हो गई थी। कोरोना की दूसरी लहर के और ज्यादा घातक होने से लोगों के मन में इस कदर डर बैठ गया कि उन्होंने घर पर ही प्रसव कराना ज्यादा सुरक्षित समझा। अप्रैल और मई माह में तीन गुना से अधिक प्रसव घरों में हुए। आंकड़ों पर गौर करें तो इन दो माह में 3542 प्रसव घरों पर हुए, जबकि पिछले साल इस अवधि में घरों पर 1386 बच्चों का ही जन्म हुआ था।
45 दिनों तक बेपटरी रही चिकित्सा सेवा
संक्रमण की दूसरी लहर का कहर अप्रैल और मई में रहा। करीब 45 दिनों तक चिकित्सा सेवा बेपटरी रही। दावा था कि गर्भवतियों की जांच और प्रसव के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं हैं, मगर आंकड़े बताते हैं कि महामारी के चलते संस्थागत प्रसव काफी कम हुए। कोरोना संक्रमण की आशंका से गर्भवतियों के परिजन ने घर को अस्पताल से ज्यादा सुरक्षित समझा। इनका पंजीकरण अब आशा वर्कर ने कराया है।
सरकारी-निजी अस्पतालों में प्रसव के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अप्रैल और मई माह में सरकारी अस्पतालों में 2866 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें तीन सौ प्रसव ऑपरेशन से हुए। निजी अस्पतालों में हुए 2224 प्रसव में 12 सौ ऑपरेशन से हुए। घर पर हुए प्रसव की बात करें तो 3542 बच्चों ने घर पर जन्म लिया। इनमें से कुछ की हालत बिगड़ी तो एंबुलेंस को कॉल की गई। अप्रैल-मई माह में 32 सुरक्षित प्रसव एंबुलेंस में हुए थे।
तीन साल में अप्रैल-मई में प्रसव की तुलना
वर्ष संस्थागत घरेलू प्रसव
2019 8491 2710
2020 4847 1386
2021 5090 3542
नोट: संस्थागत प्रसव में सरकारी और निजी अस्पतालों में हुए प्रसव का योग है।
घरों में अधिक प्रसव अधिक होने की वजह कोरोना संक्रमण को माना जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों के लिए चिकित्सा सेवाओं में कोई कमी नहीं की। आशा वर्कर को गांवों में ही रुकने के निर्देश दिए गए, ताकि वह लोगों को संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक कर सकें। - डॉ. सुुधीर गर्ग, सीएमओ