बरेली। तारकोल की महंगाई को देखते हुए शासन स्तर से ठेकेदारों को राहत देते हुए प्राइस एडजस्टमेंट (बढ़ी दरों पर भुगतान) की व्यवस्था की गई है। इसके तहत बढ़ी दरों पर बिल लगाने पर भुगतान बढ़ाकर किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।
वर्तमान में तारकोल की कीमत 80,152 रुपये प्रति मीट्रिक टन चल रही है। 100 करोड़ की लागत से लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड की 150 सड़कों का काम होना है, जबकि 168 करोड़ से निर्माण खंड प्रथम की 134 सड़कों की मरम्मत प्रस्तावित है। इन सड़कों की कुल लंबाई 366 किमी है। तारकोल की कीमतें बढ़ने के कारण अधिकतर ठेकेदारों ने काम करने से मना कर दिया था। विभाग की तरफ से पूर्व में ऐसे 200 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए थे। साथ ही, तारकोल की बढ़ी दर पर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया था। अब शासन से बढ़ी दरों पर भुगतान करने का पत्र प्राप्त हो गया है। इसके लिए उनको मथुरा रिफाइनरी के एचपीसीएल, आईओसीएल के प्लांट का बिल लगाना होगा।
वर्जन
ठेकेदारों को तारकोल की बढ़ी दर के मुताबिक भुगतान किया जाएगा। इससे ठेकेदारों को सहूलियत होगी। जिन ठेकेदारों ने काम नहीं शुरू किया है, उनको नोटिस दिए गए हैं। - राजीव अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड प्रथम