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अमर उजाला पड़ताल: बरेली में लापरवाही की काई से पटे टैंक, घरों में सप्लाई हो रहा गंदा पानी

Thu, 08 Jan 2026 05:06 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बुधवार को शहर के चार ओवरहेड टैंक की पड़ताल की। कहीं काई जमी मिली तो कही मोटर में भरे पानी में शराब की खाली बोतल पड़ी मिली।
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पानी की टंकी से टपक रहा पानी और चेकवाल्व हौदिया में भरा गंदा पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर में दूषित जलापूर्ति की घटना के बावजूद बरेली में जलकल विभाग आंखें मूंदे बैठा है। वर्षों से ओवरहेड टैंकों की सफाई नहीं कराई गई है। उनमें काई की मोटी परत जमी है। कहीं पाइप लाइन में रिसाव हो रहा है। समय पर मरम्मत नहीं होने से कई इलाकों के ओवरहेड टैंक और पाइप लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। शहरवासी पानी के नाम पर गंदगी का घूंट पी रहे हैं। जलकल विभाग की अनदेखी लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।

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शहर में 43 ओवरहेड टैंक हैं। इनसे रोज 135 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। तीन माह में ओवरहेड टैंकों की सफाई का प्रावधान है। जलकल विभाग के अनुसार, अप्रैल 2025 में अंतिम बार ओवरहेड टैंकों की सफाई हुई थी, जबकि स्थानीय निवासी इस दावे को गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई साल से यहां कोई सफाई करने नहीं आया है। कई इलाकों में गंदा पानी पहुंच रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बुधवार को शहर के चार ओवरहेड टैंक की पड़ताल की। कहीं काई जमी मिली तो कही मोटर में भरे पानी में शराब की खाली बोतल पड़ी मिली।

पुराना शहर : नहीं ली सफाई की सुध
पुराने शहर में मीरा की पैठ चुंगी के पास कुछ साल पहले ही ओवरहेड टैंक बना है। एक साल पहले इसका रंग-रोगन तो कराया गया, लेकिन विभाग को उसकी सफाई कराने की याद नहीं आई। इसी टैंक से मीरा की पैठ समेत पुराने शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति होती है। यहां आए दिन रिसाव की समस्या भी बनी रहती है और लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंचता है। 
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हरूनगला : टैंक में हो रहा रिसाव 
हरूनगला में बने ओवरहेड टैंक से शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन इसकी स्थिति खराब है। आपूर्ति वाली लाइन टूटी है, जिससे पानी का रिसाव हो रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई माह से यही स्थिति है। पानी के रिसाव की वजह से टंकी में जगह-जगह गंदगी और काई जमा हो गई है। टैंक पर अंतिम सफाई की तारीख अंकित नहीं है। 

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जगतपुर : वर्ष 2024 में हुई थी अंतिम सफाई 
जगतपुर में बने ओवरहेड टैंक की अंतिम बार सफाई वर्ष 2024 में हुई थी। तब से यहां कोई झांकने तक नहीं आया। टंकी के पास बने आपूर्ति बाॅक्स में पानी भरा हुआ था, जिसमें शराब व बीयर की बोतलें पड़ी थीं। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि यहां रात में शराबियों का जमावड़ा होता है। पानी की टंकी के पास गंदगी रहती है। टंकी स्वचालित होने के बाद यहां ऑपरेटर भी नहीं आते हैं।

सीबीगंज : एक साल पहले हुई थी सफाई 
सीबीगंज में बने ओवरहेड टैंक से खलीलपुर, स्लीपर रोड, विधौलिया, स्वालेनगर तक पानी की आपूर्ति की जाती है। इससे लाखों लोगों तक पानी पहुंचता है। स्थानीय निवासी अनिल ने बताया कि करीब एक साल पहले ओवरहेड टैंक की सफाई हुई थी। उसके बाद यहां कोई देखने भी नहीं आया। टैंक के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। उन्हें काटने भी कोई नहीं आया। 

फिटकरी मिलाकर पानी को बनाएं सुरक्षित : प्रो. दिनेश
फिटकरी के जरिये आप तमाम बीमारियों को घर में आने से रोक सकते हैं। 1,000 लीटर पानी में 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर जीवाणुओं को खत्म किया जा सकता है। बरेली कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राध्यापक दिनेश सक्सेना ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पानी का प्रेशर सामान्य हो तो पाइप लाइन में रिसाव के बावजूद गंदगी होने की आशंका नहीं रहती। नेगेटिव प्रेशर के दौरान गंदा पानी आ सकता है। 

उन्होंने बताया कि लोहे की पाइप लाइन का इस्तेमाल चिंताजनक है। इसकी जगह टिकाऊ पॉलीकार्बोनेट पाइप लाइन का इस्तेमाल करना चाहिए। पाइप लाइनों की जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) मैपिंग की भी जरूरत है, ताकि दूसरी लाइनों से इसकी ओवरलैपिंग को मॉनिटर किया जा सके। पानी की पाइप लाइन को सीवेज लाइनों या सोक पिट के पास से गुजरने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इस नजदीकी से संक्रमण का खतरा रहता है।
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नगर निगम के लिए जरूरी कदम
  • पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए वितरण सिस्टम में अलग-अलग जगहों से सैंपल लेकर उसकी जांच कराएं।
  • रिसाव, दरार, जंग आदि का पता लगाने के लिए भूमिगत पाइप लाइनों की नियमित जांच कराएं।
  • पाइप लाइनों को ओवरलैपिंग से बचाने के लिए भूमिगत पाइप लाइनों की मैपिंग और डॉक्यूमेंटेशन।
  • वितरण सिस्टम में क्लोरीन लेवल 0.2–0.5 एमजी/लीटर बनाए रखना। पानी उबालने के लिए लोगों को जागरूक करना।

जनता की जिम्मेदारी
  • सोक पिट के जरिये गंदगी मिट्टी में समा जाती है। पास से गुजर रही पानी की पाइप लाइन में रिसाव की स्थिति में यह उसमें भी मिल जाती है। इसलिए, निगम के नियमानुसार, पानी की लाइनों से सुरक्षित दूरी (आमतौर पर 15–30 मीटर) पर ही सोक पिट बनाएं।
  • सोक पिट के बजाय सही लाइनिंग वाले सेप्टिक टैंक का इस्तेमाल करें या नगर निगम के सीवर सिस्टम से जुड़ने को तरजीह दें।

जलकल विभाग के सहायक अभियंता अजित सिंह ने बताया कि ओवरहेड टैंक की सफाई के लिए टेंडर हो गया है। इसी माह सफाई का काम शुरू होगा। जिन टंकियों में रिसाव है, उन्हें भी ठीक कराया जाएगा। 
 
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