बरेली। जिले की 72 ग्राम पंचायतों में बनने वाले अन्नपूर्णा भवनों में से अब तक 21 का निर्माण अधूरा है। जो 51 भवन बन गए हैं, उनमें से भी 35 अब तक हैंडओवर के इंतजार में हैं। इन सभी का निर्माण दिसंबर तक पूरा होना था। काम की रफ्तार धीमी होने के चलते संबंधित ग्राम पंचायतों के लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा।
ग्रामीणों को हर बार सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का स्थान बदलने पर होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने के लिए अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण शुरू किया। इन भवनों का निर्माण पूरा होने से राशनकार्ड धारकों को कोटेदार के घरों में स्थित दुकानों पर नहीं जाना होगा। दुकान गलियों में होने पर भी गोदामों से दुकान तक राशन भरे ट्रकों को पहुंचाने में होने वाली समस्याओं से भी निजात मिलेगी।
इसके लिए 72 ग्राम पंचायतों का चुनाव करके यहां काम शुरू कराया गया। निर्माण की जिम्मेदारी मनरेगा को दी गई है। दिसंबर माह तक का समय निर्धारित किया गया था। अब तक निर्मित भवनों में से कुल 16 को ही जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को हस्तांतरित किया गया है। शेष 35 भवनों को अब तक मनरेगा की ओर से हैंडओवर नहीं किया गया है।
आठ लाख रुपये प्रत्येक के लिए निर्धारित है बजट
शासन की ओर से प्रत्येक अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिए कुल आठ लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया। इसमें सरकारी गल्ले के साथ ही कोटेदार अन्य घरेलू उपयोग के सामान को भी रख सकेंगे। यानी सुपर मार्केट की तरह एक ही स्थान पर हर सामान शहर की तर्ज पर मिल सकेगा। संवाद
सभी भवनों का निर्माण कार्य जल्द ही पूरा हो जाएगा। संबंधित को निर्देशित किया गया है। लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा। - हसीब अंसारी, डीसी मनरेगा