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Bareilly News: सिपाही पर भरण-पोषण के 6.45 लाख बकाया, वेतन से हर माह होगी 30 हजार कटौती

Sun, 26 Jul 2026 12:03 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। अपर न्यायाधीश संजय कुमार सिंह की अदालत ने पुलिस आरक्षी सुरेंद्र कुमार के वेतन से भरण पोषण की बकाया राशि की मासिक कटौती का आदेश दिया है। आरक्षी पर वादी सुनीता भास्कर के 6.45 लाख रुपये बकाया हैं। न्यायालय ने बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आरक्षी के वेतन से प्रतिमाह 30 हजार रुपये की कटौती सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
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आरक्षी सुरेंद्र कुमार बदायूं के दातागंज थाने में तैनात हैं। उसके विरुद्ध 17 जून 2023 को भरण-पोषण का निर्णय पारित हुआ था। सुनीता भास्कर ने वसूली वाद भी दाखिल किया। इसी वर्ष 31 जनवरी को बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सुरेंद्र कुमार के वेतन से 6.45 लाख रुपये की बकाया राशि और भरण-पोषण के लिए 13,000 रुपये प्रतिमाह की कटौती का आदेश दिया गया था, पर अब तक सुनीता के खाते में कोई राशि जमा नहीं हुई।



अब न्यायालय ने सुरेंद्र कुमार के वेतन से प्रतिमाह 30,000 रुपये की कटौती का आदेश दिया है। इसमें 13,000 रुपये मासिक भरण-पोषण के लिए हैं, जो अगले आदेश तक जारी रहेंगे। शेष 17,000 रुपये की कटौती तब तक होगी, जब तक 6,45,000 रुपये का भुगतान नहीं हो जाता। आदेश में स्पष्ट किया गया कि कटौती के बिना आरक्षी को वेतन का भुगतान न किया जाए। आदेश की प्रति बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ कोषाधिकारी को भेजी जाएगी।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर अपर अदालत की मुहर
बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश अमृता शुक्ला ने न्यायिक मजिस्ट्रेट नवाबगंज के 28 फरवरी 2023 के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव खंजन खंजनिया निवासी सोबरन सिंह को घर में घुसकर छेड़खानी के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया था।
नवाबगंज थाना क्षेत्र की एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 जुलाई 2013 को वह अपनी ननद के साथ घर में सो रही थी। सोबरन सिंह रात 11 बजे दीवार फांदकर घर में घुस आया और उसको दबोच लिया। चीखने पर वह भाग गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले की सुनवाई की। गवाहों व पीड़िता के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष ने अपील दाखिल कर इस फैसले को अपर अदालत में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद अपर अदालत ने अपील निरस्त कर दी और न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को उचित ठहराया है।
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