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चकबंदी : लुट रहा किसानों का हक, काटे जा रहे उड़ान चक

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बरेली। चकबंदी अधिकारी के पचास हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पीड़ित किसान रोशन लाल फरीदपुर के गजनेरा गांव के निवासी हैं, जहां चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। अमर उजाला टीम ने यहां जानकारी की तो पता लगा कि किसानों को जानकारी दिए बिना उड़ान चक काटकर उनका आर्थिक शोषण किया जा है।
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ग्रामीणों के अनुसार गजनेरा में 2016 में शुरू हुई चकबंदी लगभग पूर्ण हो चुकी है। किसानों को पर्चा 45 मिलना बाकी है। इससे पहले ही अधिकारी अभिलेखों व चकों में फेरबदल करने में लगे हैं। इसी फेरबदल की आड़ में सीओ रणधीर सिंह ने किसान से रिश्वत मांगी थी।

गजनेरा के गेंदन ने बताया कि उनके पिता रामचंद्र के नाम पर जमीन है। चकबंदी शुरू हुई तो उनके चक नक्शे में सही बनाए गए। अंत तक पहुंचते-पहुंचते उनके चक गलत जगह बना दिए। उनसे कई बार चकबंदी अधिकारियों ने रुपये की मांग की। उन्होंने रुपये नहीं दिए तो उनके चक गलत काट दिए। आरोप है कि चकबंदी लेखपाल से लेकर अधिकारी तक कई बार डुप्लीकेट नक्शे बनाकर किसानों को दिखाते हैं और कहते हैं कि यही असली है।
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किसानों को मनमाफिक चक देने के नाम पर वसूली करते हैं। अच्छी जगह चक लेने के लिए जिस किसान द्वारा अधिक रकम दी जाती है, अंत में वह चक उसे दे दिया जाता है। बाकी के उड़ान चक बना दिए जाते हैं, जिसका किसानों को पता नहीं नहीं होता।
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नहीं दी रिश्वत तो 36 बीघा में काट दिए छह उड़ान चक
गजनेरा के बृजेश और उनके भाई के चक शुरुआत में सही बनाए गए। चक को उन्हें दे भी दिया गया, जिसमें उन्होंने गेहूं की फसल की। इस दौरान दलालों के जरिये उनसे रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं दिए तो गांव के ही अन्य व्यक्ति को उनके लिए आवंटित चक देने का प्रलोभन देकर उससे एसओसी के यहां आपत्ति लगवाई गई। सुनवाई के दौरान उन्हें नोटिस भी नहीं भेजा गया और सेवानिवृत्त होते वक्त एक अधिकारी ने उनके चक कागजों में खत्म कर दूसरे को दे दिया। उनके उड़ान चक बना दिए। जहां उनकी बिस्वाभर जमीन नहीं थी, वहां उन्हें चक दे दिए गए। 36 बीघा जमीन को चकबंदी विभाग ने छह टुकड़ों में बांट दिया। किसान को पता ही नहीं कि उनके ये छह चक कहां पर हैं।



जारी होते हैं नोटिस पर भेजे नहीं जाते
किसान ने बताया कि जिस किसान के चक पर आपत्ति लगी होती है, उसके नाम नोटिस तो निकाला जाता है पर भेजा नहीं जाता। कागजों में ही नोटिस भेजने की खानापूरी की जाती है ताकि किसान को खेल का पता न चले और वह अपील भी न कर सके।



हाईकोर्ट के आदेश पर भी राहत नहीं
गजनेरा के राजेश कुमार ने बताया कि चकबंदी विभाग ने उनके सभी चक उड़ान बना दिए, जिसका उन्हें पता ही नहीं। पहले उन्हें सही चक दिए गए थे पर बाद में खेल कर दिया गया। इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट से स्टे ले आए। हाईकोर्ट ने विभाग के अधिकारियों को नोटिस भेजकर तलब किया। अधिकारी कोर्ट में पेश हुए। स्पष्टीकरण देने के लिए समय मांगा है। हाईकोर्ट से स्टे लाने के बाद भी चकबंदी अधिकारियों ने उनके खिलाफ कई षड्यंत्र किए।
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