भ्रष्टाचार व लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर डीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी चकबंदी लेखपाल दो बार निलंबित हो चुके हैं, फिर लापरवाही मिलने पर उन्हें निलंबित किया जाएगा।
जो भी चकबंदी लेखपाल दो बार निलंबित हो चुके हैं, फिर लापरवाही मिलने पर उप संचालक चकबंदी उन्हें बर्खास्त करें। भ्रष्टाचार कर शासन और प्रशासन की छवि धूमिल करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक पुराने विचाराधीन वादों का अभियान चलाकर दो माह में निस्तारण कराएं। यह निर्देश जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में चकबंदी विभाग की समीक्षा बैठक में दिया।
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जिलाधिकारी ने पाया कि एक अप्रैल से अब तक 13 गांवों में धारा-9 का प्रकाशन और 10 में प्रारंभिक चकबंदी योजना का प्रकाशन कराया जा चुका है। बंदोबस्त अधिकारी ने बताया कि इस वित्त वर्ष में छह के सापेक्ष अब तक 11 गांवों में कब्जा परिवर्तन का काम पूरा किया जा चुका है। दो गांवों में धारा-52 का प्रकाशन कराकर उनके अभिलेख तहसील भेजे जा चुके हैं।
जिलाधिकारी ने उप संचालक चकबंदी और बंदोबस्त अधिकारी को निर्देशित किया कि जिन गांवों में जन विरोध के चलते काम शुरू नहीं हो पा रहा है, वहां तिथि तय कर संबंधित तहसील के एसडीएम के साथ बैठक करें। यथाशीघ्र चकबंदी प्रक्रिया शुरू कराएं। चकबंदी के संबंधी परिवादों का मौके पर जाकर निस्तारण कराएं। यदि किसी परिवाद में पुनरावृत्ति हो तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।