सपा सांसद रामगोपाल पर साधा निशाना
सांसद और विधायक निधि खत्म करने के पक्षधर रवि वर्मा ने कहा कि सांसद निधि बढ़ाने की पैरवी उचित नहीं है। विधायिका का काम नौकरशाही पर निगरानी, विधानसभा और लोकसभा में जनता के हित में पैरवी करने का है, न कि खुद ठेकेदारी करने का। इसलिए निधि बढ़ाने की जरूरत कहां है। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने राज्यसभा में निधि को पांच करोड़ सालाना से 20 करोड़ किए जाने की पैरवी की है? इसका जिक्र होने पर पूर्व सांसद बोले-ये तो जनता के साथ धोखा है। रामगोपाल यादव को जब तक यह बात समझ में आएगी तब तक देर हो चुकी होगी।
उन्होंने कहा कि सांसद निधि को बढ़ाने की बात पांच किलोग्राम गल्ला की फिलॉसफी है। बस क्लास बदली हुई, जिस मौके देश में गले-गले तक कर्जा चढ़ा हुआ है, उसका समाधान ढूढ़ने की बजाए, सांसदों और विधायकों की निधि बढ़ाने की बात चल रही हो तो यह पांच किलोग्राम गल्ला से ज्यादा कुछ नहीं है।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह से हिंदुस्तान की श्रमिक पूंजी पांच किलोग्राम गल्ला देकर को प्रोडक्शन सिस्टम से बाहर किया गया, उसी तरह से सांसदों और विधायकों उनकी जिम्मेदारी से बाहर किया जा रहा है। सांसद विधायकों का काम निधि लेना नहीं है बल्कि काम सरकार के काम पारदर्शी बनाए रखने का है लेकिन निधि ने अधिकतर जनप्रतिनिधियों को ठेकेदार बना दिया।