बरेली। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सर्वे में पांच बच्चों में जन्मजात मोतियाबिंद मिला है। गर्भवती के रूबेला वायरल के संपर्क में आने से इस रोग के पनपने की आशंका जताई गई है। जिन बच्चों में मोतियाबिंद मिला उनकी जिला अस्पताल में निशुल्क सर्जरी कराई गई।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक, जन्मजात मोतियाबिंद को चिकित्सा विज्ञान में कंजेटियल रूबेला कैटरेक्ट (सीआरएस) कहते हैं। एमएमआर टीकाकरण से पहले सीआरएस के कई मामले सामने आते थे, लेकिन अब टीकाकरण से इस रोग में काफी कमी आई है। बताया कि अगर गर्भवती रूबेला वायरस के संपर्क में आ जाए तभी गर्भस्थ शिशु को यह बीमारी होने की आशंका रहती है। अगर जन्मे शिशु में सीआरएस की समस्या है तो इसका ऑपरेशन करा लेना चाहिए। अनदेखी से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
आरबीएसके मैनेजर डॉ. पारस गुप्ता के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई तक चले सर्वे के दौरान टीम को 47 बच्चे जन्मजात दोषों से ग्रसित मिले। इनमें पांच बच्चे सीआरएस से पीड़ित मिले। जिला अस्पताल में इनकी निशुल्क सर्जरी कराई गई, जो निजी अस्पताल में करीब 40 हजार रुपये में होती है। ब्यूरो
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जिला अस्पताल में भी सीआरएस की सर्जरी शुरू
डॉ. पारस के मुताबिक, करीब दो माह पूर्व तक जिला अस्पताल में जन्मजात मोतियाबिंद की सर्जरी नहीं होती थी। लिहाजा, बच्चों में रोग की पुष्टि होने पर उन्हें सीतापुर स्थित सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में सर्जरी के लिए भेजा जाता था। अब दो माह से जिला अस्पताल में भी यह सर्जरी शुरू होने से बच्चों को सीतापुर तक जाने की जरूरत नहीं होती। जिले में ही निशुल्क इलाज उपलब्ध हो रहा है।
फोटो बच्चों के
रोग से परिजन थे अनजान, समझाकर कराई सर्जरी
केस 1
- बदायूं निवासी नेकपाल की सात वर्षीय बेटी राखी की जांच में जन्मजात मोतियाबिंद के लक्षण मिले। नेत्र परीक्षण में पुष्टि के बाद जिला अस्पताल में ही निशुल्क सर्जरी कराई गई। परिजन को इस रोग की जानकारी नहीं थी। लिहाजा उन्हें रोग की गंभीरता बताकर इलाज कराया गया।
केस 2
- आंवला अलीनगर निवासी साहब सिंह के छह वर्षीय बेटे श्याम को जन्मजात मोतियाबिंद था। परिजन ने डॉक्टर को दिखाया पर महंगी सर्जरी के चलते इलाज नहीं करा सके। सर्वे में रोग की पुष्टि होने के बाद सीतापुर स्थित नेत्र चिकित्सालय में बच्चे का निशुल्क इलाज कराया गया।