निजी स्कूलों में मनमानी फीस की वसूली रोकने के लिए लाए गए राज्य सरकार के अध्यादेश का पालन कराने के लिए कमिश्नर डा. पीवी जगनमोहन ने नई रणनीति बनाई है। कमिश्नर ने बच्चों से वादा किया है कि कंट्रोल रूम में शिकायत करने वाले उनके पेरेंट्स के नाम गोपनीय रहेंगे। वे स्कूलों की मनमानी के खिलाफ खुलकर शिकायत कर सकते हैं। कमिश्नर ने कहा है कि पेरेंट्स का नाम बताए बिना स्कूल के फीस स्ट्रक्चर, ड्रेेस, जूते-मोजे और खास दुकानों से किताबों की खरीद कराने के मामलों की जांच कराई कराई जाएगी। अगर शिकायतें सही पाई गईं तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ मंडलीय कमेटी बाकायदा सिविल कोर्ट की तरह सुनवाई करेगी और अध्यादेश के प्रावधानों के तहत ही स्कूलों को दंड दिया जाएगा।
पहले अफसरों ने डीआईओएस दफ्तर में बनाए गए कंट्रोल रूम में दर्ज की जाने वाली शिकायतों में अभिभावकों के नाम खोले जाने की बात कह दी थी, जिससे अभिभावकों में असंतोष फैल गया था। अमर उजाला ने 27 अप्रैल के अंक में पेरेंट्स की परेशानी से संबंधित समाचार ‘52 शिकायतें, मगर पेरेंट्स को फीस कटौती पर कोई जवाब नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। कमिश्नर डा. पीवी जगनमोहन ने समाचार प्रकाशित होने के बाद पेरेंट्स की समस्या को गंभीरता से लिया और बताया कि कंट्रोल रूम में दर्ज की जाने अभिभावकों की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड के मान्यता प्राप्त प्राइवेट और कान्वेंट स्कूलों से अध्यादेश के बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। हर स्कूल को अपना फीस स्ट्रक्चर बताना होगा। साथ ही अध्यादेश के अन्य नियमों के पालन पर भी 15 दिन के अंदर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अन्यथा जांच में पेरेंट्स की शिकायत सही पाए जाने पर स्कूल की अध्यादेश के नियमों के अनुसार सिविल कोर्ट की तरह मंडलीय कमेटी सुनवाई करेगी। पेरेंट्स के नाम जांच के दौरान गोपनीय रखे जाएंगे।
वर्तमान सत्र में भी फीस समायोजित होगी
कमिश्नर ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन स्कूलों ने पेरेंट्स से 20 हजार से अधिक फीस जमा करा रखी है, वह बच्चों की फीस आगे एडजस्ट करेंगे। इसके साथ स्कूलों को पुरानी फीस बुक (जिनमें 20 हजार से अधिक फीस दर्ज है) वापस लेनी होगी। किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल की फीस प्री नर्सरी से इंटरमीडिएट तक 20 हजार से अधिक नहीं होगी। अगर कोई स्कूल इससे अधिक फीस वसूलता है तो उस पर मंडलीय कमेटी द्वारा अध्यादेश के नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब निजी स्कूल 20 हजार से कम की फीस बुक छपवाएंगे।
कमेटी लेगी स्कूलों की मनमानी का हिसाब
कमिश्नर ने बताया कि डीआईओएस के कंट्रोल रूम में जो भी पेरेंट्स जिन स्कूलों की फीस संबंधी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, उन शिकायतों की जांच कर स्कूलों की मनमानी का हिसाब लिया जाएगा। स्कूल के प्रिंसिपल को पेरेंट्स की समस्याओं का समाधान 15 दिन के अंदर करना होगा। अगर उसके बाद किसी पेरेंट्स ने शिकायत की तो यह समझा जाएगा कि स्कूल ने शिकायतों के निस्तारण में रुचि नहीं दिखाई। फिर आगे उसी हिसाब से जुर्माना और मान्यता हरण की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों को देने होंगे इन सवालों के जवाब
डीआईओएस अचल कुमार मिश्रा ने सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त समस्त स्कूल के प्रबंधक और प्रधानाचार्यों से राज्य सरकार के अध्यादेश पर आठ बिंदुओं पर तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। डीआईओएस ने कहा कि सीबीएसई या आईसीएसई बोर्ड की मान्यता मिलने से पहले उनको एनओसी इस प्रतिबंध के साथ दी गई थी कि राज्य सरकार समय-समय पर जो आदेश देगी, वे उसका पालन करेंगे। इसलिए निजी स्कूल शुल्क निर्धारण अध्यादेश पर इन सवालों पर स्थिति तीन दिन के अंदर स्पष्ट करें।
1- विद्यालय में वार्षिक शुल्क 20 हजार से कम है या अधिक
2- क्या आपके द्वारा फीस स्ट्रक्चर विद्यालय के सूचना पट पर लिखा गया है। विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है या नहीं
3- क्या विद्यालय में अभिभावक अध्यापक एसोसिएशन का गठन किया गया है
4- विद्यालय में कैपिटेशन शुल्क तो प्रभारित नहीं किया जा रहा है
5- विद्यालय द्वारा छात्र प्रत्येक शुल्क या प्रभार के लिए रसीद जारी की जा रही है अथवा नहीं।
6- छात्रों को पुस्तकें, जूते, मोजे, यूनिफार्म किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य तो नहीं किया जा रहा।
7- शुल्क का संपूर्ण विवरण
8- विद्यालय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और उनके निस्तारण की स्थिति तय प्रारूप पर भेजें।