एटीएम में कटे-फटे या स्याही लगे नोट मिलें तो इसे महज इत्तफाक न समझें। इसके पीछे एटीएम में करेंसी फिल करने वाली आउट सोर्सिंग कंपनियों, बैंक अफसरों और कर्मचारियों के बीच कमीशन का खेल सामने आया है। मोटी कमाई के लिए एटीएम में खराब नोटों को खपाया जाता है, जबकि एटीएम में कैश लोड करने के लिए करेंसी चेस्ट से नोटों की गड्डियों को अच्छी तरह से जांचने के बाद ही आउट सोर्सिंग कंपनी को दिया जाता है। कैश चेस्ट से अमूमन नई करेंसी ही दी जाती है। ऐसे मामलों में कस्टमर शिकायत करते भी हैं तो बैंक अधिकारी कोई एक्शन लेने के बजाय कन्नी काट जाते हैं। सिस्टम का खामियाजा आखिरकार पब्लिक को ही झेलना पड़ रहा है।
जिले के 471 एटीएम में से 95 प्रतिशत में कैश फिल करने का काम विभिन्न एजेंसियों के जिम्मे है। बैंकों के करेंसी चेस्ट से नोटों की गड्डियां लेने से लेकर उन्हें एटीएम में डालने के बीच अदला-बदली का खेल होता है। एक एटीएम में एक बार में करीब दस लाख रुपये की नकदी डाली जा सकती है। सूत्र बताते हैं कि ये एजेंसियां बैंक से ज्यादातर नई करेंसी ही लेती हैं लेकिन एटीएम में लोड करते वक्त गड्डियों की अदला-बदली कर दी जाती है। इनमें पुराने, मैले-कुचैले, कटे-फटे और स्याही लगे नोटों को खपा दिया जाता है। यह गड़बड़झाला पकड़ में इसलिए नहीं आता, क्योंकि बैंकों के करेंसी चेस्ट से निकाली गई रकम की मात्रा का तो हिसाब होता है, लेकिन सीरीज आदि का कोई रिकार्ड नहीं होता है। ऐसे में चेस्ट से जारी र्हुइं और एटीएम में लोड हुई नोटों की गड्डियों का मिलान नहीं हो पाता है। खराब नोटों को खपाने के एवज में कमीशनबाजी होती है। इसमें एजेंसियां तो शामिल होती ही हैं, बैंकों के कई अफसर और कर्मचारियों का भी हाथ होता है। इसके अलावा बैंक के अधिकारी इसलिए चुप्पी साधे रहते हैं, क्योंकि एटीएम में कैश सप्लाई का काम करने वाली आउट सोर्सिंग कंपनियों की पहुंच काफी ऊंची होती है। उनके खिलाफ कोई एक्शन लेना उनके बस की बात नहीं है। इसलिए वे तमाशाई बनकर ऐसी एजेंसियों की उंगली पर नाचते दिखाई देते हैं।
ऐसे रोकें गोलमाल होने से
एटीएम में खराब कैश खपाने में चल रहे गोलमाल को ऐसे रोका जा सकता है। एटीएम से निकासी के वक्त अगर स्याही लगे या कटे-फटे नोट मिलें तो तुरंत इसकी अपने बैंक में शिकायत करें। सात दिनों के अंदर आपकी दिक्कत का निस्तारण हो जाना चाहिए। इससे ज्यादा दिन लगने पर बैंकों को 100 रुपये रोजाना के हिसाब से पेनाल्टी देनी होगी। एटीएम से संबंधित किसी और समस्या के लिए भी सबसे पहले आप अपने बैंक में ही शिकायत करें। एक महीने तक अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आप इसके बाद बैंकिंग लोकपाल से शिकायत कर सकते हैं। अगर लोकपाल के पास नहीं जाना चाहते तो कंज्यूमर फोरम की मदद ले सकते हैं। इसमें किसी भी सिस्टम की मदद लेने से पहले बैंक को आपकी शिकायत लेने पर कार्रवाई करने के लिए एक महीने का समय देना जरूरी होता है।
एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंकते हैं बैंक
बैंकों ने अब ऐसी सुविधा दी है कि कंज्यूमर दूसरे बैंक के एटीएम से भी पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन जब कुछ गड़बड़ होती है तो दोनों बैंक अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश करते हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि आप जिस बैंक के ग्राहक हैं, किसी भी गड़बड़ी का हल करना उसी बैंक की जिम्मेदारी है। हालांकि लेनदेन का ब्योरा दूसरे बैंक से लेने में देर लग सकती है, इसलिए बेहतर यह रहता है कि अपने बैंक के एटीएम से ही रकम निकासी को वरीयता दें।
बैंकिंग लोकपाल को यहां की जा सकती है शिकायत
(यूपी और उत्तराखंड के लिए)
बैंकिंग लोकपाल, केयर ऑफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
एमजी रोड, पोस्ट बॉक्स नंबर-82
कानपुर-208001
टेलीफोन नंबर- (0512-2306278 / 2306330)