बरेली। अमेरिका-इस्राइल व ईरान युद्ध का असर कोयले की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसके चलते अमेरिकन कोयले की कीमत 15 हजार से बढ़कर 18 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई है। जिले के 150 ईंट भट्ठों में स्वदेशी सहित अमेरिकन कोयले की खपत होती है। भाव बढ़ने की वजह से ईंट भट्ठा कारोबारियों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है, क्योंकि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा की वजह से वह ईंट की कीमतें भी नहीं बढ़ा सकते।
जिले के ईंट भट्ठों को कोयले की आपूर्ति झारखंड, असम और अमेरिका से होती है। बड़े भट्ठों पर 8-15 टन कोयले की खपत होती है। अमेरिका से आने वाला कोयला बेहतर होने की वजह से उसकी मांग अधिक रहती है। ईंट भट्ठा संचालक आफताब अहमद ने बताया कि एक ट्रक में 40-42 मीट्रिक टन कोयला आता है। कोयले के दाम जब-जब बढ़ते हैं, ईंट के दाम घटते जाते हैं। बहेड़ी तहसील में पहले जहां ईंट का भाव जहां 4600-4700 रुपये प्रति हजार चल रहा था, अब यह घटकर 3800-4000 हो गया है।
और महंगा हो सकता है कोयला
कोयले का भाव बढ़ने के साथ ही उस पर 18 फीसदी जीएसटी भी जुड़ गया है। साथ ही, गुजरात से प्रतिटन पर तीन हजार रुपये भाड़ा भी बढ़ गया है। कोयले के अभी और महंगा होने के आसार हैं। - हाजी आफताब अहमद, जिलाध्यक्ष, बरेली ईंट निर्माता समिति
ईंट भट्ठे पर लगने वाला कोयला झारखंड के साथ अमेरिका से भी आता है। मैंने जनवरी में ही अमेरिकन कोयले की खेप मंगा ली थी। इससे मार्च तक काम चल जाएगा। इसके बाद भी युद्ध नहीं थमा तो महंगा कोयला खरीदना पड़ेगा। - हरीश पटेल, ईंट भट्ठा संचालक