बरेली। बुखार के साथ ही डायरिया ने भी अपना कहर ढाना शुरू कर दिया है। सोमवार को हाफिजगंज में एक चार साल के बच्चे की मौत बुखार से हो गई। नवाबगंज के क्योलड़िया में एक बच्ची ने डायरिया से दम तोड़ दिया। बरेली के जिला अस्पताल में छह रोगी बाकरगंज के भर्ती किए गए हैं। सभी लोग डायरिया और बुखार से पीड़ित हैं। बता दें कि मंडल में अब तक 50 लोगाें की जान जानलेवा बुखार से जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर अभी तक कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। बाकरगंज के जहीर (5), आफरीन (4), महक (डेढ़ साल), सना (7), सज्जाद (32) और परवेज (10) को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शाम को भर्ती कराया गया। यहां गंदगी की वजह से लोग बीमार हो रहे हैं। पानी की सप्लाई भी दूषित है। जिला अस्पताल में ओपीडी की संख्या भी पिछले एक सप्ताह में 12 सौ से बढ़कर 2400 को पार कर गई है।
- हाफिजगंज में एक बच्चे की मौत
हाफिजगंज। बकैनिया गांव के मोहन लाल के चार साल के बेटे आयुश की मौत हो गई है। वह तीन दिन से बुखार से पीड़ित था। हालत बिगड़ने पर घर वाले उसे बरेली के प्राइवेट अस्पताल ले गए थे। वहां सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। गांव में छह से ज्यादा बच्चे बुखार की चपेट में हैं।
- धिमरी का आधा गांव डायरिया से पीड़ित, एक की मौत
क्योलड़िया। धिमरी ग्राम में डायरिया के प्रकोप से आधा गांव पीड़ित है। भदपुरा ब्लाक में ओमप्रकाश की दो वर्षीय बेटी बरखा की डायरिया से मृत्यु हो गई। यहां सौ से भी अधिक लोग बीमार हैं। अधिकतर ग्रामीण अपना उपचार निजी चिकित्सकों से करा रहे हैं। सूचना पर दलेलनगर पीएचसी की टीम ने गांव में फैली गंदगी को साफ रखने की सलाह दी। दवा बांटी।
- संग्रामपुर में दवाइयां बांटी
बरसेर। रामनगर पीएचसी से डॉक्टरों ने गांव के 113 लोगों का चेकअप कर दवा बांटी। 40 लोगों के खून के नमूने भी लिए गए। पीएचसी प्रभारी अजय कुमार ने सामान्य बुखार बताया है।
- आखिर क्याें हो रहा है बुखार खतरनाक
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फीजिशियन और सीएमएस डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि मौसम बदला है तो वायरल होता है। यह सामान्य बात है। इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस हावी होते हैं। सावधान रहना जरूरी है। मनुष्य के शरीर में 98.6 फारेनहाइट बुखार का ताप रहता है। इससे अधिक होने पर तबियत खराब लगती है। इसलिए थर्मामीटर से नापते रहें। बुखार को 104 फ ारेनहाइट न पहुंचने दें। तेज बुखार को पाइरेक्सिया कहते हैं। इसमें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, ठंडी पट्टी माथे पर रखते रहें। उन्होंने बताया कि बुखार आने पर खाना और पानी छोड़ देना घातक होता है। बुखार से मौत का कारण दिमाग में असर प्रमुख है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि खन्ना बताते हैं कि वायरस के प्रति लापरवाही ही जानलेवा होती है। वायरल जब लापरवाही करें तब घातक होता है और यही जान लेता है। इसलिए बुखार में दवा लेने से पहले डॉक्टर से मिले, घर बैठे इलाज न करें।
- पिछले एक सप्ताह में जिला अस्पताल में मरीज
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