बरेली। प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (सीएम ग्रिड) के चौथे चरण को लेकर नगर निगम में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पार्षदों ने नगर निगम की कार्यशैली और प्लानिंग पर सवाल खड़े करते हुए करोड़ों रुपये की इस परियोजना को सरकारी धन की बर्बादी करार दिया है।
पार्षदों का आरोप है कि निगम उन सड़कों को दोबारा बनाने की तैयारी कर रहा है, जिनका निर्माण अभी महज एक साल पहले ही करोड़ों की लागत से बनाया गया है। राजेंद्र नगर में सीएम ग्रिड के चौथे चरण का काम होना है, जिसमें राजेंद्र नगर चौराहे से 3.19 किलोमीटर की सड़क को 79.63 करोड़ की लागत से बनाया जाना प्रस्तावित है। योजना के परवान चढ़ने से पहले ही सपा पार्षदों से निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि डेढ़ साल पहले की राजेंद्र नगर व आसपास की सड़क को करीब 10 करोड़ के बनाया गया था, लेकिन अब फिर से सड़क को तोड़ कर उसे दोबारा बनवाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि नई सड़कों को तोड़कर फिर से बनाना वित्तीय अनियमितता के समान है। उन्होंने चौपुला से लेकर घंटाघर तक के मार्ग, चौधरी तालाब से मिनी बाइपास तक की कनेक्टिविटी और वीवीआईपी मूवमेंट वाली सर्किट हाउस सड़क को चौड़ा करने की मांग उठाई, ताकि शहरवासियों को जाम और खराब रास्तों से निजात मिल सके। पार्षद शमीम अहमद ने कहा कि फुटपाथ की जगह निगम सड़क को चौड़ा करना चाहिए, जिससे लोगों को राहत मिल सके।
फुटपाथ को लेकर पहले ही हो चुका है विरोध
सीएम ग्रिड योजना के दौरान डीडीपुरम में बनाए गए चौड़े फुटपाथ को लेकर पार्षदों के विरोध के बाद निगम को बैकफुट पर आना पड़ा था। पार्षदों ने कहा था कि चौड़े फुटपाथ बनने से सड़क छोटी हो गई है जिससे आने वाले दिनों में वहां पर जाम की स्थिति बनी रहेगी, जिसमें बाद नगर निगम में स्थान देखकर फुटपाथ बनाने की बात कही है, जिससे वहां पर जाम आदि की समस्या न हो सके।