सबके अपने-अपने दावे
सपा के रणनीतिकारों का यह भी दावा रहा है कि जो वोट प्रतिशत घटा है, वह मुस्लिम इलाकों में नहीं घटा है और उन्हें इसका पूरा फायदा मिला है। दूसरी ओर बसपा प्रत्याशी ने जाटवपुरा और ब्रह्मपुरा में सबसे अधिक वोट हासिल किए। यहां दूसरे दल आसपास नहीं दिखाई दिए। कांग्रेस मढ़ीनाथ में बेहतर करती दिखाई दी, मगर किसी खास बिरादरी पर पकड़ न होने से किसी भी वार्ड में एक तरफा मुकाबला करते नहीं दिखाई दी। हालांकि कांग्रेसियों का दावा है कि उन्हें हर बूथ से वोट मिले हैं।
सपा के राजनीतिक पंडितों ने दावा किया कि तीन लाख 47 हजार वोटों में सपा समर्थित प्रत्याशी को करीब एक लाख 60 हजार वोट मिलेंगे और भाजपा के प्रत्याशी को एक लाख 40 हजार वोट मिलेंगे। बाकी 47 हजार वोटों में बसपा, कांग्रेस और बाकी सभी रहेंगे। भाजपा रणनीतिकारों ने कहा कि उन्होंने एक-एक बूथ की गिनती की है और उनके प्रत्याशी को इस बार करीब एक लाख 80 हजार वोट मिलेंगे जबकि सपा समर्थित प्रत्याशी एक लाख का आंकड़ा भी नहीं छू पाएंगे।
पाठकों को बता दें कि ये सभी दावे और कयास हैं। अभी असल तस्वीर साफ होना बाकी है। उसके लिए 13 मई का इंतजार करना होगा और वोटों की गिनती ही प्रत्याशियों का भविष्य तय करेगी।