बरेली। जंक्शन पर सोमवार को हुए हादसे में एक और यात्री की जान चली गई। इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा। चलती ट्रेनों में भीड़भाड़ के बीच यात्री चढ़ते-उतरते और बेरोकटोक पटरियों को पार करते दिखे। सुरक्षाकर्मी भी नदारद रहे।
दिल्ली-बरेली-लखनऊ रेल लाइन काफी व्यस्त है। जंक्शन पर रोजाना औसतन 42-45 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। जीआरपी और आरपीएफ के आंकड़ों पर गौर करें तो हर महीने जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से लेकर छह तक 40-45 हादसे होते हैं। बरेली सिटी से कैंट रेलवे स्टेशन तक औसतन 25 से 30 रनओवर की घटनाएं होती हैं। मई में इस तरह के हादसों में पांच लोगों की जान जा चुकी है। जून की पहली तारीख को वेटरनरी फार्मासिस्ट की मौत हो गई।
इस हादसे के बाद भी जंक्शन पर सुरक्षा के बंदोबस्त नाकाफी हैं। जिम्मेदार चप्पे-चप्पे पर सीसी कैमरे लगे होने की दावा करते हैं, लेकिन सच्चाई इससे उलट है। त्रिवेणी एक्सप्रेस का जंक्शन पहुंचने का समय सुबह 11:19 बजे है, लेकिन सोमवार को यह गाड़ी 11:15 बजे ही जंक्शन पर पहुंच गई। ट्रेन 11:33 बजे जंक्शन से चली। इसी दौरान हादसा हो गया। हादसे के बाद कई तरह की अफवाह भी उड़ीं। पहले कहा गया कि चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान हादसा हुआ। मृतक की पत्नी का बयान सामने आने के बाद साफ हो गया कि फार्मासिस्ट की मौत ट्रेन से गिरने के कारण हुई है। इसके बाद जीआरपी ने सीसी कैमरे खंगालने शुरू किए, लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर एक पर लगे किसी कैमरे में वीडियो फुटेज नहीं मिला। इंस्पेक्टर का कहना है कि जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, शायद वह स्थान सीसी कैमरे की रेंज में नहीं है।
प्लेटफॉर्म नंबर चार पर मिला अज्ञात शव
जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर सोमवार को अज्ञात महिला का शव भी मिला। काफी कोशिश के बाद भी शिनाख्त नहीं हो सकी। मृतका की आयु 55 वर्ष से अधिक प्रतीत हो रही है। उसके कपड़े भी काफी गंदे हैं। उसकी स्थिति बीमारों जैसी लग रही है। पंचनामा भरकर शव मोर्चरी में रखवा दिया गया है।