नाले की सफाई या नोट की मलाई- 10
नालो की सफाई के लिए नगर निगम ने रात का समय चुना है। बुधवार से इसकी शुरूआत हो चुकी है। अभियान के रूप में लगातार एक- एक नाले को साफ किया जाएगा। बुधवार को पहले दिन बदायूं रोड का नाला और शाहजहांपुर हाइवे पर जेसीबी से सफाई की गई। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की टीम भी इस मौके पर मौजूद रहे। अमर उजाला ने लगातार 10 दिन तक नालों की चौपट सफाई व्यवस्था पर अभियान चलाकर नगर निगम प्रशासन की नींद तोड़ने की कोशिश की थी।
शहर में अधिकांश नालों की सफाई हर साल केवल कागजों पर ही होती है। 40 से 60 लाख रुपये का बजट तय किये जाने के बाद भी पूरी तरह नाले की सिल्ट साफ नहीं होती। इससे बरसात के दिनों में जलभराव होने से कोई रोक नहीं पाता। कई नालों पर तो 90 फीसदी अतिक्रमण है, ऐसे में इसकी सफाई हो पाना मुश्किल होता है केवल खुले स्थानों से ही कूड़ा निकाला जाता है। बुधवार से नाला सफाई का काम शुरू हुआ है, लेकिन इस बार यह रात में होगा ताकि अतिक्रमण, गर्मी और लोगों की भीड़ से मुक्ति मिले। बरसात से पहले शहर के आठ बड़े नाले और 40 से अधिक छोटे नालों को साफ किया जाएगा।
- वंशीनगला और संजय नगर में मुसीबत बना नाला
संजय नगर इलाके में कूड़ा भरा होने से नाले का पानी सड़क पर आ गया है। यहां लोग गंदे पानी से बचकर निकल रहे हैं। इलाके के बृजेश पांडे ने बताया कि नगर निगम के सुपरवाइजर को सूचना दी गई है, लेकिन उनकी ओर से बताया गया कि सफाई की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। यहां रहने वाले सागर कश्यप, रूप किशोर, वीरेंद्र कुमार, सूरज, अनुज अग्रवाल, विजित कुमार ने बताया कि अभी बारिश से पहले ही नाला उफनाने लगा है। इसके चलते कई गलियाें में पानी भरने की शुरूआत हो गई है। वंशीनगला वार्ड की गली में राजेंद्र मौर्य के घर से लेकर टीकाराम के घर तक हमेशा ही जलभराव रहता है। गली की लंबाई करीब 120 मीटर है। नगर निगम में कई बार शिकायत के बाद भी कोई सफाई करने नहीं पहुंचता। स्थिति ये है कि गंदे पानी की वजह से संक्रामक बीमारियां और मच्छर पनप रहे हैं। यहां रहने वाली सुषमा देवी, ममता, नीलम, प्रीति, माया, संजीव, पार्वती, मिथलेश, राजेश, कमलेश कश्यप व अन्य ने बताया कि नाली का पानी खाली प्लाटों में भी भर जाता है।