टपकते छत के नीचे और कच्ची फ र्श पर बैठकर इस बार बच्चे नहीं पढ़ेंगे। जर्जर घोषित हो चुके स्कूलों में एहतियात के तौर पर कक्षाएं न लगाने को कह दिया गया है। मानसूनी सीजन में बच्चों की क्लास दूसरे स्कूलों में लगेंगी। कुछ मान्यता प्राप्त स्कूलों की भी सहायता ली जाएगी। बीएसए की ओर से यह निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी महानगर को दिए गए हैं।
जिले में 41 स्कूल जर्जर हैं। इनमें 40 स्कूल तो शहर में ही हैं। किसी में एक कमरा है तो किसी में दो। यहां बैठने को फर्श तक नहीं है। कच्ची फर्श पर बच्चे चटाई बिछाकर पढ़ते हैं। कई स्कूलाें में एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक के बच्चे साथ बैठकर पढ़ते हैं। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो बीएसए ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी महानगर नरेंद्र सिंह पवार से कहा है कि वे इन स्कूलाें में कक्षाएं तत्काल प्रभाव से न लगाने को कहें। जब तक दूसरे स्कूल नहीं मिलते तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बीईओ नरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि जिन स्कूलाें में कक्षाएं नहीं लगेंगी उनके बच्चों को दूसरे पास के स्कूल में शिफ्ट किया गया है। साथ ही कुछ पास के मान्यता प्राप्त स्कूल की भी मदद ली जायेगी।
जर्जर स्कूल की गिरी दीवार
मझगवां ब्लाक के नगरिया सतन प्राथमिक विद्यालय की दीवार बारिश के चलते गिर गई। यह बहुत जर्जर थी। यह ग्रामीण क्षेत्र में एकमात्र स्कूल है जो जर्जर घोषित है। यहां कक्षा न लगाने और इसके निर्माण के आदेश बीएसए ने दिए हैं।
कोट
जर्जर स्कूलाें की हालत ठीक नहीं है, ऐसे में रिस्क नहीं ले सकते। बीईओ महानगर को स्कूल शिफ्ट करने को कहा गया है। ऐसे स्कूलाें में बारिश को देखते हुए पढ़ाई नहीं होगी।
ऐश्वर्या लक्ष्मी, बीएसए