फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छुट्टा पशुओं से फसल बचाने को जूझ रहे किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
पलियाकलां। समस्याओं से जूझ रहे किसानों को आय दोगुनी करने का सरकारी फार्मूला रास नहीं आ रहा है। कारण साफ है कि मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती तो लावारिस पशु फसल बरबाद कर देते हैं। वहीं गन्ना के भुगतान से लेकर धान और गेहूं खरीद के लिए भी उसे समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
विज्ञापन

बता दें कि कड़ाके की ठंड में किसानों को अपनी फसलों का बचाव लावारिस पशुओं से करने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पशुओं का पूरा का पूरा झुंड जिस खेत में घुस जाता है वहां पर फसलों की तबाही मचा देता है। किसान गायों से ज्यादा सांड़ों से परेशान हैं क्योंकि गायों को तो गोशाला में रखा जा सकता है लेकिन सांड़ों को कोई गोशाला रखना नहीं चाहती। सरकार पशुओं को आश्रय प्रदान के लिए हर गांव, नगर पंचायत, नगर पालिका आदि में गोशालाओं का लगातार निर्माण कराने का आदेश दे रही है पर इससे कोई हल निकलता नहीं दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर गोशाला में काफी संख्या में मवेशियों की संख्या है लेकिन सबसे बड़ा कारण यह है कि सांड़ों को कहां रखा जाए। इस स्तर पर अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। जिससे किसानों को अब सांड़ों से अपनी फसल को बचाने का एक और काम बढ़ गया है। वहीं यही सांड़ हमलावर होकर किसानों व ग्रामीणों पर हमला भी कर देते हैं। जिससे वह गंभीर घायल हो जाते हैं। ऐसे में अब प्रशासनिक स्तर से सांड़ों के लिए भी कोई ठिकाना बनाना चाहिए ताकि गांवों में घूम रहे यह छुट्टा सांड़ किसानों की फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें।
गांवों में सबसे ज्यादा आतंक मचाते हैं छुट्टा पशु
इलाके में घूम रहे दर्जनों की संख्या में लावारिस मवेशी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही उनपर हमला करने से भी नहीं चूक रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। चौकी क्षेत्र के गांव नौगवां, बनघुसरी, बेला, कोठिया, भगवन्तनगर, चैखड़ा फार्म आदि में आवारा पशुओं ने लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है। आवारा घुमंतू पशु जहां किसानों के खेतों में लहलहा रही गेहूं व लाही फसलों को चरकर बरबाद कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें