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फास्टैग को लेकर मारामारी, टोल प्लाजा और बैंकों से नहीं मिल पा रहा है टैग

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बरेली। फास्टैग लगाने की अवधि बढ़ने से लोगों को राहत जरूर मिल गई है, फिर भी शनिवार पूरे दिन लोग इसके लिए भागमभाग में लगे रहे। टोल प्लाजा, बैंक और नामित एजेंसियां टैग की मांग पूरी नहीं कर पाए। टोल पर टैग स्कैन होने की समस्या बनी रही, इससे वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं। जाम में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी फंस गए, किसी तरह पुलिस ने रास्ता साफ कराया।
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एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने आधी अधूरी तैयारियों के बीच फास्टैग व्यवस्था लागू कर दी है। एनएचएआई ने भले ही 15 दिसंबर से इसे लगाना अनिवार्य किया है लेकिन स्थिति यह है कि फास्टैग का स्टॉक ही नहीं है। इसके शुल्क को लेकर भी भ्रम बना हुआ है। तमाम लोग टैग पाने के लिए भागदौड़ करते दिखे लेकिन उन्हें टैग नहीं मिल पाया। पेटीएम से जरूर कुछ लोगों के पंजीकरण तो हुए मगर उन्हें टैग सप्लाई में पूरा सप्ताह लग जाएगा। उधर, टोल प्जाला पर फास्टैग स्कैन नहीं होने से वाहन चालकों की प्लाजा स्टाफ से नोकझोंक हुई।
फतेहगंज पश्चिमी। टोल प्लाजा पर फास्टैग स्कैन नहीं होने से वाहन चालक और टोल कर्मचारियों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। बताया जाता है कि एनएचएआई सर्वर ओवरलोड हो गया है, इससे टैग स्कैन होने में देरी हो रही है। टैग स्कैन नहीं होने से टोल पर लंबा जाम लग रहा है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी जाम में फंस गए। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी चंद्रकिरण पहुंचे और पुलिस ने लाठी फटकार कर मंत्री की कार को किसी तरह से दूसरी लाइन से निकाला। टोल पर हुई मारपीट में एक ट्रक चालक के कपड़े भी फट गए। बाद में टोल प्रभारी की अगुवाई में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। बार-बार स्कैन करने बावजूद फास्टैग कनेक्ट नहीं होने से विवाद होते रहे।
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