बरेली। जिला प्रशासन के आदेश को नजर अंदाज कर जीआईसी ग्राउंड में उर्स-ए-रजवी से पहले ही दुकानें लगा रहे पटाखा कारोबारियों को सीएफओ ने पुलिस की मदद से रोक दिया। कारोबारियों ने इस पर जीआईसी के प्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पुलिस-प्रशासन पर भी भेदभाव का आरोप लगाया। सीएफओ ने पटाखा कारोबारियों के आरोपों को खारिज करते हुए साफ किया कि उर्स से पहले किसी भी हालत में पटाखों की दुकानें नहीं लगने दी जाएंगी।
प्रशासन ने पटाखा दुकानदारों को 26 अक्तूबर से दुकानें लगाने की अनुमति दी है। इसके बाद भी दुकानदारों ने रविवार को जीआईसी मैदान में दुकानें लगानी शुरू कर दीं। रविवार रात साढ़े नौ बजे सीएफओ चंद्रमोहन शर्मा यहां पहुंचे और फिर कोतवाली पुलिस को बुलाकर दुकानें लगाने से रोक दिया। उनके लौटने के बाद पार्षद व आतिशबाजी कारोबारी राजकुमार गुप्ता ने दूसरे कारोबारियों के साथ हंगामा शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य के इशारे पर आए एक शिक्षक उन्हें बता गए कि प्रति दुकान 2500 रुपये की रसीद कॉलेज प्रशासन काटेगा। इसके अलावा 50 हजार रुपये अलग से लिए जाएंगे। गुप्ता का कहना था कि जब उर्स की दुकानें फ्री लगती हैं तो दिवाली पर आतिशबाजी की दुकानें क्यों नहीं लग सकतीं। इस भेदभाव में अफसर भी शामिल हैं।
पटाखा कारोबारियों ने अभी तक कॉलेज प्रशासन से अनुमति नहीं ली है। उन्हें 26 से दुकानें लगानी हैं तो इतने उतावले क्यों हैं। अभी मैदान को उर्स के लिहाज से भी कवर किया जाना है। इसीलिए अभी इन्हें रोका गया है। - सीएम शर्मा, सीएफओ
उर्स के लिए डीएम कॉलेज ग्राउंड अधिकृत करते हैं। कॉलेज प्रशासन का उसमें दखल नहीं होता। इन कारोबारियों के पास न अभी प्रशासन की अनुमति है न उन्होंने कॉलेज में अनुमति को आवेदन किया है। फर्जी आरोप अलग लगा रहे हैं। - रमेश वर्मा, प्रधानाचार्य जीआईसी